कटनी में एलएंडटी कंपनी के 300 श्रमिकों का भड़का गुस्सा: 8 महीने से वेतन नहीं, अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
स्थिति पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं — क्या कंपनी जल्द समाधान निकाल पाएगी या आंदोलन और उग्र होगा
स्थिति पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं — क्या कंपनी जल्द समाधान निकाल पाएगी या आंदोलन और उग्र होगा

कटनी, 13 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में एलएंडटी (Larsen & Toubro) कंपनी के ठेके पर कार्यरत लगभग 300 श्रमिकों ने मंगलवार को काम पूरी तरह ठप कर दिया और एनकेजे इलेक्ट्रिक लोको शेड गेट के सामने धरना शुरू कर दिया।
श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन द्वारा वर्ष 2021 से लगातार अन्याय किया जा रहा है और उन्हें उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया है।
श्रमिकों ने बताया कि पिछले 8 महीनों से उन्हें कोई वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके परिवारों की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। वे कंपनी से तत्काल बकाया राशि के भुगतान, बोनस और अन्य लाभों की मांग कर रहे हैं।
श्रमिकों की प्रमुख मांगें और आरोप:बकाया वेतन: पिछले 8 महीनों का पूरा वेतन तत्काल जारी किया जाए।बोनस: पिछले 5 वर्षों का लंबित बोनस भुगतान।
ओवरटाइम भुगतान: रोजाना औसतन 4 घंटे अतिरिक्त कार्य कराया जाता है, लेकिन उसका कोई भुगतान नहीं।
वैधानिक लाभों की कमी: भविष्य निधि (PF) कटौती और जमा, मेडिकल सुविधा, सुरक्षा उपकरण (PPE), टीए-डीए, हाइट अलाउंस जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।
सुरक्षा और अन्य मुद्दे: कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों की कमी और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का अभाव।प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने विशेष रूप से फिलिप्स पंडियन (फेब्रिकेशन हेड), विनोद सिंह (बीएसी), अमिमिष सिंह (साइड इंचार्ज) और रविंद्र सिंह जैसे अधिकारियों के नाम लिए हैं। श्रमिकों का कहना है कि यदि बातचीत से जल्द समाधान नहीं निकला तो धरना अनिश्चितकालीन हो जाएगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आंदोलन का नेतृत्व: इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व सुनील पटेल, संजय सिंह राजपूत, नीरज पटेल, राम नारायण यादव, लवकेश सिंह परिहार, सुमित पटेल और हरिपाल चौरसिया सहित सैकड़ों मजदूर कर रहे हैं।
श्रमिकों ने पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन पर डाली है और चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
यह घटना कटनी में श्रमिकों के बीच बढ़ते असंतोष को दर्शाती है, जहां कई ठेकेदार कंपनियों में वेतन, PF और अन्य लाभों को लेकर शिकायतें आम हैं।
स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग की नजर इस धरने पर टिकी हुई है, क्योंकि इससे रेलवे से जुड़े कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
श्रमिकों ने सभी नागरिकों, संगठनों और मीडिया से अपील की है कि वे उनके संघर्ष में समर्थन दें ताकि कंपनी पर दबाव बनाया जा सके। स्थिति पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं — क्या कंपनी जल्द समाधान निकाल पाएगी या आंदोलन और उग्र होगा?
