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Katni news चार केंद्र प्रभारियों को अगले दो वर्षों तक धान उपार्जन कार्य से पूरी तरह पृथक

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जिला प्रशासन का यह प्रयास सुनिश्चित करेगा कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य समय पर मिले और सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग न हो।

जिला प्रशासन का यह प्रयास सुनिश्चित करेगा कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य समय पर मिले और सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग न हो।

Katni news चार केंद्र प्रभारियों को अगले दो वर्षों तक धान उपार्जन कार्य से पूरी तरह पृथक

कटनी मध्य प्रदेश 22 जनवरी 2026 में कटनी जिले में धान उपार्जन प्रक्रिया में सख्ती बरतते हुए जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। लापरवाही और गंभीर अनियमितताओं के चलते चार केंद्र प्रभारियों को अगले दो वर्षों तक धान उपार्जन कार्य से पूरी तरह पृथक कर दिया गया है।

यह फैसला कलेक्टर आशीष तिवारी के सख्त निर्देशों पर लिया गया है, ताकि किसानों के हितों की रक्षा हो और सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।जांच में सामने आईं प्रमुख अनियमितताएंखरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत धान खरीदी के दौरान कलेक्टर द्वारा गठित संयुक्त जांच दल ने जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। जांच में कौड़िया, हथियागढ़, निगहरा और विजयराघवगढ़ केंद्रों पर कई गंभीर खामियां पाई गईं, जिनमें शामिल हैं:दस्तावेजों का उचित संधारण (रखरखाव) न होनाधान की बोरियों पर आवश्यक स्टेंसिल और टैग का पूर्ण अभावतौल (वजन) प्रक्रिया में मानक नियमों की अनदेखीइन कमियों के आधार पर संबंधित प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया।दंडित किए गए केंद्र प्रभारीप्रशासन द्वारा दो साल के लिए उपार्जन कार्य से हटाए गए प्रभारी निम्नलिखित हैं:रामनारायण गर्ग (विजयराघवगढ़ केंद्र)बसंत सिंह (निगहरा केंद्र)पंकज पाण्डेय (कौड़िया केंद्र)गजराज पटेल (हथियागढ़ केंद्र)प्रशासन का साफ संदेशजिला आपूर्ति अधिकारी सज्जन सिंह परिहार के अनुसार, यह कार्रवाई किसानों के साथ न्याय सुनिश्चित करने और प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के लिए की गई है।

कलेक्टर आशीष तिवारी ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस सख्त रुख से जिले के अन्य उपार्जन केंद्रों में भी हड़कंप मच गया है और अधिकारियों में जिम्मेदारी का भाव बढ़ा है।यह कदम न केवल अनियमितताओं पर लगाम कसने वाला है, बल्कि पूरे प्रदेश में किसान-हितैषी प्रशासन की मिसाल भी पेश कर रहा है।

जिला प्रशासन का यह प्रयास सुनिश्चित करेगा कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य समय पर मिले और सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग न हो।

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