कटनी में 8 वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म के आरोपी को 20 वर्ष की सश्रम कारावास की सजाविशेष पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया कठोर फैसला, 1000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया
यह मामला नाबालिगों की सुरक्षा और अपराधियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है
यह मामला नाबालिगों की सुरक्षा और अपराधियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है

कटनी (मध्य प्रदेश), 28 जनवरी 2026: कटनी जिले में एक सनसनीखेज और जघन्य अपराध के मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) ने आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है।
लगभग 8 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म करने के दोषी बेडीलाल कोल को भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एम)/6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपये का अर्थदंड सुनाया गया है।
यह फैसला माननीय अनन्य विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट), कटनी द्वारा दिया गया। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक/सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्री आशुतोष द्विवेदी ने की, जिनके मजबूत तर्कों, साक्ष्यों और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।घटना का संक्षिप्त विवरणमामला अप्रैल 2025 का है।
पीड़िता की नानी ने महिला थाना कटनी में शिकायत दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता (कक्षा 2 की छात्रा) अपनी नानी-नाना के साथ गांव में रहती थी।
19 अप्रैल 2025 की सुबह करीब 10 बजे नानी ने पीड़िता को खेत में आम के पेड़ के नीचे बिछे पलंग पर छोड़कर पास के सरकारी हैंडपंप से पानी लेने गईं।
लौटकर देखा तो पलंग हिल रहा था और कंबल से ढका हुआ था। कंबल हटाने पर आरोपी बेडीलाल कोल पीड़िता के ऊपर बिना कपड़ों के लेटा हुआ था और गलत हरकत कर रहा था। नानी के धक्का देने पर आरोपी भाग गया।इसके बाद नानी ने पीड़िता को कपड़े पहनाए और घटना के बारे में पूछा।
पीड़िता ने आरोपी द्वारा गलत काम करने की बात बताई। नानी ने परिवारजनों को सूचित किया और पीड़िता की मां के साथ थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। इस पर महिला थाना कटनी में अपराध क्रमांक 16/2025 दर्ज हुआ, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(2) एवं पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एम)/6 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
अभियोजन की मजबूत पैरवीविवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ मजबूत अभियोग पत्र विशेष पॉक्सो न्यायालय में दाखिल किया गया। विचारण के दौरान विशेष लोक अभियोजक ने सभी साक्षी, दस्तावेज, चिकित्सकीय रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए।
अदालत ने इनसे सहमत होते हुए आरोपी को दोषी ठहराया और कठोर सजा सुनाई।मीडिया सेल प्रभारी सुरेंद्र कुमार गर्ग ने बताया कि यह फैसला बच्चों के खिलाफ अपराधों पर शून्य सहिष्णुता की नीति का मजबूत संदेश है।
समाज में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता और त्वरित न्याय की आवश्यकता है।यह मामला नाबालिगों की सुरक्षा और अपराधियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
