कटनी: उमरार नदी किनारे रेत के टीले में दबकर 5 वर्षीय मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत
प्रशासन से भी अपील की जा रही है कि नदी किनारे रेत के टीले और खदान क्षेत्रों में सख्त निगरानी और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकें
प्रशासन से भी अपील की जा रही है कि नदी किनारे रेत के टीले और खदान क्षेत्रों में सख्त निगरानी और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकें

कटनी (मध्य प्रदेश), एक संवेदनशील हादसे में जिले के बरही थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बहेरघटा में बुधवार शाम को 5 साल की नन्ही बच्ची की रेत के मलबे में दबने से मौत हो गई।
घटना इतनी अचानक हुई कि बच्ची के साथ खेल रहे अन्य बच्चे कुछ समझ पाते या मदद मांग पाते, तब तक निशा पूरी तरह रेत के नीचे दब चुकी थी।घटना का विवरणमृतक बच्ची की पहचान ग्राम बहेरघटा निवासी मिथुन केवट की 5 वर्षीय पुत्री निशा केवट के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम लगभग 7 बजे निशा अपने साथी बच्चों के साथ उमरार नदी के किनारे खेल रही थी। नदी किनारे बने रेत के एक बड़े टीले के अचानक गिरने से निशा उसके नीचे दब गई।
दम घुटने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।ग्रामीणों और परिजनों ने बच्चों की चीख-पुकार सुनकर तुरंत मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत से निशा को रेत के ढेर से बाहर निकाला। उसे तत्काल बरही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
इस दर्दनाक खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजन व ग्रामीण रो-रोकर बेसुध हो गए।पुलिस जांचघटना की सूचना मिलते ही बरही थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
अस्पताल से प्राप्त मेमो के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर मर्ग कायम किया है। पुलिस अब घटना के पूरे परिस्थितिजन्य विवरण की गहन जांच कर रही है, जिसमें रेत के टीले के निर्माण और सुरक्षा के पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
सुरक्षा की चेतावनीऐसी घटनाएं अक्सर नदी-नालों के किनारे अनियंत्रित रेत खनन या प्राकृतिक रेत के ढेरों के कारण होती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को अकेले या बिना निगरानी के ऐसे खतरनाक स्थानों पर खेलने से रोकना चाहिए।
प्रशासन से भी अपील की जा रही है कि नदी किनारे रेत के टीले और खदान क्षेत्रों में सख्त निगरानी और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकें।
