कटनी में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मामले में नया मोड़ आया है। शुरुआत में सामूहिक दुष्कर्म मामले में मोड़ गैंगरेप नहीं मित्र ने किया रेप
सीएसपी और थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित और पारदर्शी जांच पर जोर दिया है। यह मामला POCSO कानून के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जहां नाबालिग की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है
सीएसपी और थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित और पारदर्शी जांच पर जोर दिया है। यह मामला POCSO कानून के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जहां नाबालिग की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है

कटनी। नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मामले में नया मोड़ आया है। शुरुआत में सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की आशंका जताई गई थी, लेकिन पुलिस की गहन जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस आशंका को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।
घटना का विवरणकटनी के एन.के.जे. थाना क्षेत्र की एक नाबालिग छात्रा (लगभग 15 वर्षीय) ने 2 फरवरी 2026 को जिला अस्पताल में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। पेट दर्द की शिकायत पर अस्पताल पहुंचने के बाद गर्भावस्था का पता चला, जिसके बाद पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) सक्रिय हुई।
प्रारंभिक रिपोर्टों में गैंगरेप की बात सामने आई थी, लेकिन महिला थाना और CWC की संयुक्त काउंसलिंग में पीड़िता ने अपना बयान दर्ज कराया।
मुख्य खुलासे इस प्रकार हैं:पीड़िता ने स्पष्ट किया कि कोई सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ।घटना उसके एक परिचित मित्र (आरोपी) द्वारा अकेले अंजाम दी गई थी।संबंध उसके साथी के साथ ही थे, किसी अन्य की संलिप्तता नहीं।पुलिस की कार्रवाईतकनीकी साक्ष्यों (जैसे फोरेंसिक/मेडिकल रिपोर्ट) और पीड़िता के बयान के आधार पर मुख्य आरोपी को चिह्नित किया गया।
आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है।एन.के.जे. थाना पुलिस ने POCSO एक्ट के साथ अन्य संबंधित धाराओं (IPC की दुष्कर्म संबंधित धाराएं) के तहत मामला दर्ज किया।जांच जारी है और आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया चल रही है।
वर्तमान स्थितिपीड़िता और नवजात शिशु दोनों सुरक्षित हैं। वे जिला अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं और आवश्यक देखभाल मिल रही है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच, मौके के साक्ष्य और पूछताछ से गैंगरेप की कोई पुष्टि नहीं हुई।सीएसपी और थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित और पारदर्शी जांच पर जोर दिया है।
यह मामला POCSO कानून के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जहां नाबालिग की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है।
