google1b86b3abb3c98565.html

कटनी की लाल पहाड़ी पर 5 करोड़ की सरकारी जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा: फर्जी एनओसी पर सवाल, हाईकोर्ट आदेशों का दुरुपयोग

0

अब देखना यह है कि कलेक्टर और नगर निगम इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं। अगर आरोप साबित हुए तो यह कटनी में एक और बड़ा भूमि घोटाला साबित हो सकता है।जांच रिपोर्ट का इंतजार है… क्या लाल पहाड़ी की यह बंदरबांट रुकेगी, या फिर कुछ और खुलासे होंगे?

अब देखना यह है कि कलेक्टर और नगर निगम इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं। अगर आरोप साबित हुए तो यह कटनी में एक और बड़ा भूमि घोटाला साबित हो सकता है।जांच रिपोर्ट का इंतजार है… क्या लाल पहाड़ी की यह बंदरबांट रुकेगी, या फिर कुछ और खुलासे होंगे?

कटनी। शहर की मशहूर लाल पहाड़ी (बरगवां क्षेत्र) पर स्थित कीमती शासकीय भूमि को लेकर एक गंभीर भूमि घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि नगर निगम की मिलीभगत से मात्र 0.081 हेक्टेयर (लगभग 20 एकड़ का हिस्सा) सरकारी जमीन पर फर्जी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी कर उसे निजी हाथों में पहुंचा दिया गया। इस जमीन का गाइडलाइन मूल्य करीब 5 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर आशीष सिंह और नगर निगम आयुक्त को लिखित शिकायत देकर एनओसी को तत्काल निरस्त करने और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।फर्जी एनओसी का खेलनगर निगम ने 24 दिसंबर 2018 को पीआर डन (Patrick Robert Dunn) के नाम पर ग्राम बरगवां, खसरा नंबर 209/5 की 0.081 हेक्टेयर भूमि के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी किया।

शिकायत के अनुसार यह एनओसी गलत तथ्यों और भ्रामक जानकारी के आधार पर निकाला गया, जिससे शासन को करोड़ों का आर्थिक नुकसान हुआ।बाद में इस भूमि को सरिता अग्रवाल (पति सुमित अग्रवाल, निवासी आनंद विहार कॉलोनी) के नाम पर बेच भी दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब एनओसी ही अवैध है, तो विक्रय भी रद्द होना चाहिए।हाईकोर्ट आदेशों का गलत इस्तेमालशिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह है

कि एनओसी जारी करते समय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के दो आदेशों का जानबूझकर गलत हवाला दिया गया:रिट याचिका क्रमांक 1286/2013 — यह खसरा 209/5 से जुड़ी नहीं थी, बल्कि 209/4 और 210/1 के अतिक्रमण मामले से संबंधित थी।रिट अपील क्रमांक 209/2015 — इसमें भी इस खसरे का कोई जिक्र नहीं था।इसे सुनियोजित साजिश और तथ्य छिपाने का मामला बताया गया है।

स्टेटस-को की अनदेखीयह भूमि नगर सुधार न्यास की योजना नंबर 3 और 17 के अंतर्गत पहले से अधिग्रहित है। हाईकोर्ट ने इसमें स्टेटस-को (यथास्थिति) बनाए रखने का आदेश दिया था, जो आज भी प्रभावी है। इसके बावजूद एनओसी जारी कर दी गई।17 सितंबर 2018 की मेयर-इन-काउंसिल बैठक में आपत्तियां दर्ज हुई थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। 15 फरवरी 2019 की नगर निगम परिषद बैठक में भी विरोध दर्ज हुआ, फिर भी अंतिम फैसला लंबित रखा गया।

प्रशासन की प्रतिक्रियानगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार ने कहा:“नगर सुधार न्यास की योजनाओं से जुड़ी भूमि के विक्रय संबंधी शिकायत मिली है। जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। जल्द ही जांच रिपोर्ट आने के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जमीनों का सीमांकन भी कराया जाएगा।”क्यों मची है बवाल?लाल पहाड़ी पर वर्षों से बाक्साइट उत्खनन का खेल चल रहा है, लेकिन इस बार मामला सीधे शासकीय भूमि के फर्जी तरीके से निजीकरण का है।

राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित इस कीमती जमीन पर कई की नजर लगी हुई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निगम के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से यह पूरा प्रकरण अंजाम दिया गया।

अब देखना यह है कि कलेक्टर और नगर निगम इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं। अगर आरोप साबित हुए तो यह कटनी में एक और बड़ा भूमि घोटाला साबित हो सकता है।जांच रिपोर्ट का इंतजार है… क्या लाल पहाड़ी की यह बंदरबांट रुकेगी, या फिर कुछ और खुलासे होंगे?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed