google1b86b3abb3c98565.html

ई-विकास प्रणाली’ की अनदेखी पड़ी महंगी, 14 समिति प्रबंधकों पर सख्त कार्रवाई

0

कलेक्टर ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी की सेहत को ध्यान में रखते हुए केवल संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें।

कलेक्टर ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी की सेहत को ध्यान में रखते हुए केवल संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें।

2 प्रबंधक निलंबित, 12 का एक सप्ताह का वेतन कटेगाकटनी (27 मई 2026) — ई-विकास प्रणाली का पालन न करते हुए नियमों के विरुद्ध उर्वरक वितरण करने पर 14 समिति प्रबंधकों पर सख्त कार्रवाई की गई है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर दो समिति प्रबंधकों को तत्काल निलंबित कर दिया गया, जबकि 12 अन्य प्रबंधकों के मई 2026 के वेतन से 7 दिन की कटौती के आदेश जारी कर दिए गए हैं।कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर जिले में 1 अप्रैल 2026 से ‘ई-विकास प्रणाली’ लागू की गई थी, जिसके तहत उर्वरकों का शत-प्रतिशत विक्रय ई-टोकन के माध्यम से ही होना था। समीक्षा के दौरान पाया गया कि कई समितियों ने इस डिजिटल प्रणाली की अनदेखी की और पारंपरिक तरीके से खाद का वितरण जारी रखा।

निलंबन की कार्रवाईकलेक्टर के निर्देश पर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (पैक्स) सिनगौड़ी, खितौली एवं उबरा के समिति प्रबंधक श्री बाबूजी सेन तथा सिनगौड़ी समिति के खाद खरीदी प्रभारी सहायक प्रबंधक श्री सतीश कुमार निगम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।वेतन कटौतीई-विकास प्रणाली में लापरवाही बरतने वाले 12 समिति प्रबंधकों (संवर्ग एवं प्रभारी) के मई 2026 के वेतन से 7 दिन की कटौती की जाएगी। इनमें शामिल प्रमुख नाम हैं

:कटनी शाखा: नेहा चौरसिया, सतीश तिवारी, प्रमोद कुमार उपाध्यायबड़वारा शाखा: मनोज द्विवेदी, देवानंद सिंह रघुवंशी, राहुल तिवारीबाकल शाखा: संतोष दीक्षित, बाबूजी सेनउमरियापान शाखा: संतोष दुबे, रबि तिवारीरीठी शाखा: सुनील कुमार सोनीकलेक्टर की सख्त चेतावनीकलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने स्पष्ट कहा कि किसानों को पारदर्शी तरीके से खाद उपलब्ध कराने के लिए ई-विकास प्रणाली अनिवार्य है। अब खाद की मात्रा किसान की जमीन (खसरा नंबर) और फसल के आधार पर सॉफ्टवेयर तय करेगा, जिससे कालाबाजारी और अतिरिक्त भंडारण पर रोक लगेगी।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी समिति या निजी विक्रेता बिना ई-टोकन के उर्वरक विक्रय करता पाया गया तो उसके विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई के साथ पुलिस में एफआईआर दर्ज की जाएगी।

कलेक्टर ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी की सेहत को ध्यान में रखते हुए केवल संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed