शहीदों की स्मृति पर चला बुलडोजर: 1962 के वीरों का ‘शहीद द्वार’ ढहाया गया
प्रशासन ने अभी तक पुनर्निर्माण को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। नागरिक इस मामले में जल्द से जल्द सकारात्मक कदम की उम्मीद जता रहे हैं।
प्रशासन ने अभी तक पुनर्निर्माण को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। नागरिक इस मामले में जल्द से जल्द सकारात्मक कदम की उम्मीद जता रहे हैं।

कटनी। नगर की ऐतिहासिक धरोहर और नई बस्ती की पहचान बने ‘शहीद द्वार’ को स्थानीय प्रशासन ने सोमवार को बुलडोजर चला कर जमींदोज कर दिया। जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाए गए इस कदम से स्थानीय नागरिकों में गहरा दुख और आक्रोश व्याप्त है।1962 के भारत-चीन युद्ध में देश के लिए शहीद हुए वीर सैनिकों की स्मृति में 1963 में जन-सहयोग से निर्मित यह द्वार पिछले 63 वर्षों से कटनी की शान बना हुआ था। नई बस्ती के प्रवेश द्वार के रूप में यह गौरवपूर्ण प्रतीक स्थानीय लोगों की भावनाओं से जुड़ा था।ट्रक की टक्कर से हुआ क्षतिग्रस्तबीती रात एक अनियंत्रित रेत के डंपर/ट्रक ने इस द्वार को टक्कर मार दी थी,
जिससे यह काफी क्षतिग्रस्त हो गया। प्रशासन ने क्षतिग्रस्त संरचना को खतरनाक मानते हुए उसे तोड़ने का फैसला लिया।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घटना की तत्काल जांच की जाए। उन्होंने कहा, “अगर ट्रक की टक्कर से हादसा हुआ है तो क्षेत्र के CCTV फुटेज खंगाले जाएं, दोषी चालक की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।”नागरिकों की एक और प्रमुख मांग है कि शहीदों के इस स्मारक का यथाशीघ्र पुनर्निर्माण किया जाए ताकि शहीदों की स्मृति और स्थानीय गौरव को पुनर्स्थापित किया जा सके।भावुक अपीलस्थानीय निवासियों का कहना है कि यह द्वार केवल ईंट-गारे की संरचना नहीं, बल्कि 1962 के युद्ध में प्राण न्योछावर करने वाले वीरों के बलिदान की अमर याद था। इसके ढहने से पूरे कटनी शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचा है।
प्रशासन ने अभी तक पुनर्निर्माण को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। नागरिक इस मामले में जल्द से जल्द सकारात्मक कदम की उम्मीद जता रहे हैं।
