कटनी में दिल दहला देने वाला हादसा: तालाब में नहाने गए 11 वर्षीय नाबालिग की डूबने से मौत, परिवार में कोहराम
स्थानीय प्रशासन से अपील है कि ऐसे जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा के उपाय जैसे बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और बचाव उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके
स्थानीय प्रशासन से अपील है कि ऐसे जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा के उपाय जैसे बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और बचाव उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके

कटनी (मध्य प्रदेश), 15 जनवरी 2026 – कटनी जिले के कैलवारा खुर्द गांव में गुरुवार दोपहर एक 11 वर्षीय बच्चे की तालाब में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई।
मृतक बच्चा तीन दिन पहले ही अपनी नानी के घर ननिहाल आया था और दोस्तों के साथ नहाने के दौरान यह हादसा हुआ। घटना ने पूरे गांव और परिजनों को गम में डुबो दिया है।
मृतक की पहचान श्रेयांश चौधरी (11 वर्ष), पुत्र सुरेश चौधरी, निवासी भरवारा के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, श्रेयांश तीन दिन पहले कैलवारा खुर्द स्थित अपनी नानी के घर पहुंचा था।
गुरुवार दोपहर वह गांव के अन्य बच्चों के साथ पास के तालाब में नहाने गया। नहाते समय वह अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा।
साथ में मौजूद बच्चों ने तुरंत शोर मचाया, जिसकी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और स्थानीय तैराक घटनास्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों ने मिलकर श्रेयांश को पानी से बाहर निकाला, लेकिन उस समय उसकी सांसें बहुत धीमी चल रही थीं।
परिजनों और ग्रामीणों ने उसे तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।पुलिस जांच शुरू कोतवाली थाना अंतर्गत बस स्टैंड चौकी प्रभारी सिद्धार्थ राय ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह मामला नहाने के दौरान डूबने का प्रतीत हो रहा है।
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मर्ग कायम कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिवार के सदस्यों और गांव वालों में शोक की लहर है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों और जलाशयों के पास बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों या छुट्टियों में बच्चों को अकेले या बिना निगरानी के तालाबों-नदियों के पास न जाने की सख्त हिदायत दी जानी चाहिए।
स्थानीय प्रशासन से अपील है कि ऐसे जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा के उपाय जैसे बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और बचाव उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
