google1b86b3abb3c98565.html

मध्य प्रदेश में विकास की नई राजनीति: आदिवासी क्षेत्रों को प्राथमिकता, लेकिन कटनी की उपेक्षा एक गंभीर सवाल

0

अन्यथा, विकास की यह नई उड़ान अधूरी और असंतुलित ही रहेगी।

अन्यथा, विकास की यह नई उड़ान अधूरी और असंतुलित ही रहेगी।

प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में विकास की परियोजनाओं का विस्तार तेजी से हुआ है, खासकर उन क्षेत्रों में जो लंबे समय से पिछड़ेपन और उपेक्षा की शिकायत करते रहे हैं। हाल की घोषणाओं के अनुसार, शहडोल, मंडला, छिंदवाड़ा और नीमच जैसे आदिवासी बहुल जिलों में एयरस्ट्रिप रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत नए एयरपोर्ट (एयरस्ट्रिप) का निर्माण कार्य जल्द शुरू होने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि मध्य प्रदेश विमानन नीति-2025 के तहत प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है, जिससे ये चार नए एयरपोर्ट प्रदेश की कुल संख्या को और बढ़ाएंगे।

ये जिले ऐतिहासिक रूप से आदिवासी बहुल और आर्थिक रूप से कमजोर रहे हैं। यहां सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन आज स्थिति बदल रही है। इन जिलों में पहले ही शासकीय मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं या पूर्ण रूप से कार्यरत हैं—जैसे शहडोल में बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नीमच में वीरेंद्र कुमार सकलेचा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, छिंदवाड़ा और मंडला में भी मेडिकल शिक्षा की मजबूत नींव रखी गई है।

एयरपोर्ट निर्माण से इन क्षेत्रों में व्यापार, पर्यटन, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।यह विकास निश्चित रूप से सराहनीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘उड़े देश का आम नागरिक’ (UDAN) विजन को साकार करने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने का एक मजबूत प्रयास दिखाती है।

पिछड़े इलाकों को हवाई संपर्क देकर सरकार न केवल आर्थिक असमानता को कम करने का दावा कर रही है, बल्कि सामाजिक न्याय की भावना को भी मजबूत कर रही है।लेकिन इसी विकास की रोशनी में एक गंभीर सवाल उभरता है—कटनी क्यों पीछे छूट रही है?कटनी जिला, जो मध्य प्रदेश का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और खनन केंद्र है, लंबे समय से हवाई पट्टी या एयरपोर्ट से वंचित है।

यहां की जनता ने विकास की उम्मीद में कई बार आवाज उठाई, लेकिन हर बार कारण सामने आया—जबलपुर की निकटता (करीब 100 किमी) या माइनिंग क्षेत्रों के कारण भूमि उपलब्धता की समस्या। पड़ोसी जिलों में एयरपोर्ट और मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं, जबकि कटनी में ऐसी कोई बड़ी परियोजना नहीं दिख रही।यह स्थिति सिर्फ कटनी की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की विकास नीति पर सवाल उठाती है। क्या विकास का पैमाना सिर्फ आदिवासी बहुल या राजनीतिक महत्व के जिलों तक सीमित है?

क्या औद्योगिक महत्व वाले जिलों को प्राथमिकता में कम आंका जा रहा है? क्या कटनी की जनता को यह संदेश मिल रहा है कि उनकी मेहनत और योगदान के बावजूद उन्हें विकास की मुख्यधारा से बाहर रखा जा सकता है?विकास समावेशी होना चाहिए। जब एक तरफ आदिवासी क्षेत्रों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है—जो निश्चित रूप से जरूरी और सराहनीय है—तो दूसरी तरफ कटनी जैसे जिलों की उपेक्षा विकास की प्रक्रिया में असंतुलन पैदा करती है। यह असंतुलन न केवल स्थानीय असंतोष को जन्म देता है,

बल्कि राज्य की एकता और समान विकास के सपने को भी चुनौती देता है।सरकार को चाहिए कि वह कटनी को भी प्राथमिकता सूची में शामिल करे। यहां एयरस्ट्रिप या छोटे एयरपोर्ट की संभावना तलाशी जाए, खासकर जब पड़ोसी जिलों में ऐसी परियोजनाएं सफल हो रही हैं। विकास की रफ्तार सभी जिलों के लिए समान होनी चाहिए—न कि चुनिंदा क्षेत्रों के लिए।कटनी की जनता को विकास नहीं मिल रहा—यह सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि एक गंभीर वैचारिक चुनौती है। यदि सरकार वाकई में ‘सबका साथ, सबका विकास’ में विश्वास रखती है, तो कटनी जैसे जिलों को भी उसी गति से आगे बढ़ाना होगा।

अन्यथा, विकास की यह नई उड़ान अधूरी और असंतुलित ही रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed