कटनी। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की जोरदार मांग की। यह मांग हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी एपस्टीन फाइल्स (Jeffrey Epstein Files) में उनके नाम के उल्लेख के आधार पर उठाई गई है।मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा और प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी के निर्देश पर आज कटनी में महिला कांग्रेस की शहर जिला अध्यक्ष रजनी वर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज किया और उनके तत्काल इस्तीफे व कड़ी सजा की मांग की।ज्ञापन में प्रमुख आरोप:एपस्टीन फाइल्स में लाखों दस्तावेजों, ईमेल्स, वीडियो और छवियों के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम शामिल होने से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि धूमिल हुई है।यह जनता में असुरक्षा की भावना पैदा करता है, खासकर जब ऐसे घृणित अपराधों (नाबालिगों के यौन शोषण, क्रूर प्रताड़ना आदि) से जुड़े विवाद में कोई सत्ता पदाधिकारी का नाम आए
।कांग्रेस का कहना है कि जनता रक्षक चुनती है, लेकिन अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो सरकार का कर्तव्य है कि ऐसे व्यक्तियों को पद से हटाए और सजा दे।भाजपा सरकार के मौन रहने की कड़ी आलोचना की गई।कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति:जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित शुक्ला के अलावा मंजू निषाद, आदिता वर्मा, शोभा मंगलानी, गीता निषाद, सुमन रजक, मंजू रजक, पूजा समुद्रे, मुमताज बानो, कल्पना पाठक, लता खरे, राकेश जैन, राजा जगवानी, जितेंद्र गुप्ता, मुन्ना कुशवाहा, शशि शेखर भारद्वाज, संजय गुप्ता, दिग्विजय सिंह, मंगल सिंह, मनोज वर्मा, शशांक वर्मा, राजेश जाटव, अभिषेक शिवहरे, अहमद कुरेशी, अभय सिंह, हर्ष सेन, रमेश अहिरवार, अभय शर्मा, सुरेंद्र मिश्रा, विनोद अहिरवार, ओम प्रकाश प्रजापति सहित दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ:यह विरोध प्रदर्शन पूरे देश में महिला कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी द्वारा चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। फरवरी 2026 में जारी एपस्टीन फाइल्स में हरदीप सिंह पुरी के नाम का कई बार जिक्र मिलने (ईमेल एक्सचेंज और मुलाकातों के संदर्भ में) के बाद कांग्रेस ने लगातार इस्तीफे की मांग की है।
मंत्री पुरी ने स्पष्ट किया है कि ये संपर्क उनके पूर्व राजनयिक/अंतरराष्ट्रीय संगठनों (जैसे International Peace Institute) से जुड़े पेशेवर थे, और इनमें किसी अपराध से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोपों को राजनीतिक और बेबुनियाद बताया है।विपक्ष का दावा है कि ऐसे गंभीर विवाद में मंत्री का पद पर बने रहना नैतिक रूप से अस्वीकार्य है, जबकि सरकार पक्ष ने किसी गलत कार्य का कोई प्रमाण न होने की बात कही है।
यह मुद्दा मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है।
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