कटनी: अमानक बीज बेचने वाले दो विक्रेताओं का लाइसेंस निलंबित, कलेक्टर के सख्त निर्देश
जिले में चल रहे विशेष अभियान के तहत अब तक 9 अमानक बीज विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके
जिले में चल रहे विशेष अभियान के तहत अब तक 9 अमानक बीज विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके

कटनी, 08 सितंबर 2025 – किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए कटनी जिले में सघन जांच अभियान तेजी से चल रहा है। कलेक्टर श्री दिलीप कुमार यादव के कड़े निर्देशों के तहत अमानक खाद-बीज बेचने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में विकासखंड रीठी में दो बीज विक्रेताओं के विक्रय प्राधिकार पत्र तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।
अमानक बीज पर कार्रवाई
उपसंचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास और उर्वरक पंजीयन अधिकारी डॉ. आर.एन. पटेल ने बताया कि रीठी विकासखंड के दो विक्रेताओं, मेसर्स प्रकाश कृषि केंद्र (प्रो. सौम्या मिश्रा), रैपुरा और मेसर्स अयांश बीज भंडार, रैपुरा के धान के बीजों के नमूने प्रयोगशाला जांच में अमानक पाए गए। बीज गुण नियंत्रण आदेश 1983 की धारा 15 के तहत इनके विक्रय प्राधिकार पत्र निलंबित किए गए हैं।
मेसर्स प्रकाश कृषि केंद्र: 21 नवंबर 2024 को जारी प्राधिकार पत्र, जो 20 नवंबर 2029 तक वैध था, निलंबित।
अब तक 9 विक्रेताओं पर कार्रवाईजिले में चल रहे विशेष अभियान के तहत अब तक 9 अमानक बीज विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं। कलेक्टर श्री यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।कालाबाजारी पर भी सख्तीकलेक्टर ने उर्वरक की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, टैगिंग, मिसब्रांडिंग, गुणवत्ताहीन उर्वरक बिक्री और अवैध परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इसकी निगरानी का जिम्मा संबंधित एसडीएम और कृषि विभाग के अधिकारियों को सौंपा गया है।
किसानों के हित में कलेक्टर की प्रतिबद्धता
कलेक्टर श्री यादव ने स्पष्ट किया कि अन्नदाता किसानों के हितों की रक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
”जिले में यह अभियान निरंतर जारी रहेगा ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले संसाधन उपलब्ध हो सकें।
