कटनी, 17 अक्टूबर 2025 – मध्य प्रदेश के कटनी शहर को नदी किनारे एक आधुनिक रिवर फ्रंट देकर पर्यटन और सौंदर्यीकरण का सपना दिखाने वाली अमृत 2.0 योजना अब सवालों के घेरे में है। कटनी नदी के कटाए घाट पर निर्माणाधीन इस परियोजना का बुधवार को निगम अध्यक्ष मनीष पाठक ने पार्षद दल के साथ स्थल निरीक्षण किया, जहां तकनीकी खामियां, गुणवत्ता में समझौता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। नाराजगी जताते हुए पाठक ने कार्य को बंद कराने के साथ थर्ड पार्टी ऑडिट करवाने को कहा है।यह पहला मौका नहीं है जब इस प्रोजेक्ट में लापरवाही की पोल खुल रही हो – पिछले कुछ महीनों में दो बार निरीक्षण के दौरान ही ऐसी कमियां पकड़ी गईं।
परियोजना का बैकग्राउंड: सपनों का शहर, लेकिन जमीनी हकीकत कड़वी
कटनी रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की ‘अमृत 2.0’ योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शहरी जल निकायों को साफ-सुथरा और पर्यटन स्थल बनाना है। कटनी नदी के किनारों पर घाटों का सौंदर्यीकरण, वॉकवे, लैंडस्केपिंग और सुरक्षा दीवारें बनाने के लिए करोड़ों रुपये आवंटित किए गए हैं। जून 2025 में नगर निगम की बैठक में इस परियोजना समेत शहर विकास के लिए 511 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ था, लेकिन अधिकारियों पर ठेका कंपनियों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे थे। परियोजना की शुरुआत से ही स्थानीय निवासियों ने नदी प्रदूषण और निर्माण गुणवत्ता पर चिंता जताई है, खासकर मोहन घाट और मसुरहा घाट जैसे क्षेत्रों में।
बुधवार का निरीक्षण: सुरक्षा और गुणवत्ता पर सवाल
पाठक के नेतृत्व में हुए निरीक्षण में कार्यदायी एजेंसी की लापरवाही साफ नजर आई। प्रमुख खामियां इस प्रकार हैं:
कॉलम निर्माण में तकनीकी त्रुटि: संरचना के कॉलमों में सरिया बाहर निकली हुई मिली, जो इंजीनियरिंग मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है। इससे पूरी संरचना की मजबूती पर खतरा मंडरा रहा है।
पीचिंग कार्य की निम्न गुणवत्ता: नदी किनारे की पिंचिंग (सुरक्षा दीवार) इतनी कमजोर साबित हुई कि पहली ही बारिश में पत्थर उखड़ गए। सितंबर 2025 में पितृपक्ष के दौरान भी इसी तरह की पिंचिंग बहने की शिकायतें सामने आई थीं, जब घाटों का पानी इतना प्रदूषित हो गया कि तर्पण के लिए भी अयोग्य हो गया।
तकनीकी निगरानी का अभाव: बेस ढलाई के समय न नगर निगम का इंजीनियर मौजूद था, न ही एजेंसी का प्रतिनिधि। इससे कार्य की पारदर्शिता पर सवाल उठे।
सागौन पेड़ों की कटाई पर अस्पष्टता: संरक्षित सागौन वृक्षों की कटाई को लेकर सुपरवाइजर राजू तिवारी कोई ठोस जवाब नहीं दे सके।
बेस जांच में कमियां: बेस की मोटाई और लेवल मानक से कम पाया गया, जो भविष्य में बाढ़ जैसी आपदा में जोखिम बढ़ा सकता है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: साइट पर श्रमिकों के लिए हेलमेट, दस्ताने जैसे उपकरणों की कमी थी, साथ ही बैरिकेडिंग भी अनुपस्थित।
निरीक्षण में शशिकांत तिवारी (जिला योजना समिति सदस्य), राजेश भास्कर, ओम प्रकाश बल्ली सोनी और एजेंसी सुपरवाइजर राजू तिवारी मौजूद रहे। निगम अध्यक्ष मनीष पाठक ने सोशल मीडिया पर वीडियो और फोटो शेयर कर कहा, “कटाए घाट रिवर फ्रंट कार्य में अनियमितता, जनहित के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं।”
पिछली घटनाएं: बार-बार की चेतावनी, लेकिन सुधार नहीं
यह समस्या नई नहीं है। अगस्त 2025 में मोहन घाट पर पाठक ने ही रिवर फ्रंट कार्य का निरीक्षण किया था, जहां लापरवाही पर फटकार लगाई गई। उन्होंने स्पष्ट कहा था, “रिवर फ्रंट के निर्माण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” इसके बावजूद सुधार न होने से स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और ठेकेदारी के खेल के आरोप लग रहे हैं। सितंबर में पिंचिंग बहने की घटना ने तो योजना की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए।
निगम अध्यक्ष का सख्त रुख: ‘जनता का विश्वास टूटने नहीं दूंगा’
पाठक ने कहा, “जनहित के कार्यों में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह सरकारी धन का दुरुपयोग और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है।” उन्होंने अधिकारियों को थर्ड पार्टी से गुणवत्ता जांच कराने को कहा है। निगम ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब हर चरण पर वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी।
आगे क्या? उम्मीदें और चुनौतियां
कटनी जैसे छोटे शहर के लिए रिवर फ्रंट न केवल पर्यटन का केंद्र बनेगा, बल्कि नदी संरक्षण का प्रतीक भी। लेकिन लगातार उजागर हो रही कमियां योजना की सफलता पर सवालिया निशान लगा रही हैं। थर्ड पार्टी ऑडिट की रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है, जो ठेकेदारों पर कार्रवाई का आधार बनेगी। स्थानीय पार्षदों का कहना है कि यदि सुधार न हुए तो विरोध प्रदर्शन तेज होंगे। नगर निगम ने वादा किया है कि जनता के प्रति जवाबदेही बनाए रखी जाएगी।
यह घटना मध्य प्रदेश के अन्य शहरी विकास प्रोजेक्ट्स के लिए भी सबक है – जहां करोड़ों खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता का ध्यान न रखा जाए, तो ‘अमृत’ नाम की योजना ‘विष’ बन जाती है।
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