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कटनी: एलएंडटी-बीएसी श्रमिकों ने IRCON कार्यालय घेरा, AGM को सुनाई खरी-खोटी; 19 दिनों से जारी आंदोलन तेज

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इस विवाद का समाधान निकालें, ताकि प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो सके और श्रमिकों को उनका हक मिल सके।

इस विवाद का समाधान निकालें, ताकि प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो सके और श्रमिकों को उनका हक मिल सके।

कटनी: एलएंडटी-बीएसी श्रमिकों ने IRCON कार्यालय घेरा, AGM को सुनाई खरी-खोटी; 19 दिनों से जारी आंदोलन तेज कटनी

।कटनी जिले के झिंझरी में चल रहे IRCON के ग्रेड सेपरेटर प्रोजेक्ट पर कार्यरत एलएंडटी और बीएसी कंपनी के सैकड़ों श्रमिकों का आंदोलन अब उग्र रूप ले चुका है। पिछले 19 दिनों से बकाया भुगतान की मांग को लेकर हड़ताल पर बैठे श्रमिकों ने आज IRCON के मुख्य कार्यालय का घेराव कर दिया

। उन्होंने जोरदार नारेबाजी की और प्रबंधन के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हुए AGM सुजीत कुमार को जमकर खरी-खोटी सुनाई।मुख्य मांगें: बकाया बोनस, पीएफ और सुरक्षाश्रमिकों के प्रतिनिधिमंडल ने AGM से मुलाकात में अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखीं:बकाया बोनस और पीएफ: 12 जनवरी से प्रोजेक्ट पर काम बंद होने के बावजूद अभी तक बोनस और प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) की राशि नहीं मिली है।

श्रमिकों का कहना है कि यह उनका हक है और इसे तुरंत जारी किया जाए।टालमटोल की शिकायत: स्थानीय अधिकारी और ठेकेदार केवल मौखिक आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। श्रमिकों ने कहा, “हम अब सिर्फ वादों से नहीं मानेंगे।”काम पर वापसी की शर्त: जब तक पूरा भुगतान नहीं होता, श्रमिक काम पर नहीं लौटेंगे।

उन्होंने कार्यस्थल पर सुरक्षा और उचित मुआवजे की भी मांग की।AGM सुजीत कुमार ने श्रमिकों की बातों को गंभीरता से सुना और चर्चा की, लेकिन श्रमिकों ने स्पष्ट किया कि वे अब केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेंगे। उन्हें तत्काल उनके हक का पैसा चाहिए।प्रोजेक्ट पर गहराता संकटयह प्रोजेक्ट, जिसकी शुरुआती लागत 1200 करोड़ रुपये थी, अब बढ़कर 1800 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

17 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर काम पूरी तरह ठप पड़ गया है, जिससे रेलवे को भारी वित्तीय और समयगत नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। यदि IRCON, एलएंडटी और ठेकेदार कंपनियों के बीच जल्द समझौता नहीं होता, तो विवाद और लंबा खिंच सकता है, जिसका असर क्षेत्रीय विकास और रेल यातायात पर पड़ सकता है

।श्रमिकों का कहना है कि वे मजबूरी में आंदोलन कर रहे हैं, क्योंकि उनके परिवारों की रोजी-रोटी दांव पर लगी है। स्थानीय प्रशासन और कंपनी प्रबंधन से अपील है कि वे तुरंत हस्तक्षेप कर

इस विवाद का समाधान निकालें, ताकि प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो सके और श्रमिकों को उनका हक मिल सके।

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