कटनी में कोयले का बड़ा भंडार मिला: उमड़ार नदी किनारे रेत खदान से निकला काला सोना, GSI की टीम करेगी जांच

लेकिन पर्यावरण संरक्षण और कानूनी उत्खनन सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।

कटनी में कोयले का बड़ा भंडार मिला: उमड़ार नदी किनारे रेत खदान से निकला काला सोना, GSI की टीम करेगी जांच कटनी, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में खनिज संपदा की एक नई अध्याय जुड़ गया है।

बड़वारा तहसील के लोहरवारा ग्राम पंचायत के सलैया केवट इलाके में उमड़ार नदी के किनारे स्थित एक रेत खदान में उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के विशाल भंडार की खोज हुई है। यह खोज न केवल जिले की आर्थिक क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। पहले से ही सोने और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स के संकेतों के लिए चर्चित कटनी अब कोयले के हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहा है।

खोज की कहानी: रेत से निकला कोयलारेत खनन के दौरान अचानक पत्थर जैसा काला पदार्थ निकलने लगा, जो ग्रामीणों द्वारा उच्च गुणवत्ता वाला कोयला पहचाना गया। खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। सुबह से ही लोग बोरियों, साइकिलों और यहां तक कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में कोयला भरकर ले जा रहे हैं। इस अवैध उत्खनन ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया है।

घटनास्थल उमड़ार नदी से सटा हुआ है, जहां रेत खदान का घाट कोयले के भंडार का केंद्र बन गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यह ‘काला सोना’ उनके इलाके की किस्मत बदल सकता है, लेकिन अवैध तरीके से इसे ले जाना कानूनी समस्या पैदा कर रहा है।प्रशासन की त्वरित कार्रवाईस्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग ने स्थिति पर काबू पाने के लिए तुरंत कदम उठाए।जिला खनिज अधिकारी रत्नेश दीक्षित ने अवैध उत्खनन को रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए।

उन्होंने बताया, “उमड़ार नदी के पास कोयला निकलने की सूचना मिली है, और हमने उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया है।”जल्द ही खनिज विभाग और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर सैंपलिंग और सर्वे करेगी। इस जांच से कोयले के भंडार के फैलाव, कैलोरीफिक वैल्यू (ऊष्मीय मान) और गुणवत्ता की स्पष्ट जानकारी मिलेगी। यदि रिपोर्ट सकारात्मक रही, तो यहां एक बड़ी कोयला खदान विकसित हो सकती है।

ऐतिहासिक संदर्भ और आर्थिक महत्वकटनी जिला पहले से ही खनिजों का खजाना माना जाता है। लगभग पांच महीने पहले यहां आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 56,400 करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए गए थे, जो जिले की माइनिंग क्षमता को रेखांकित करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिटिकल मिनरल्स, सोने के बाद अब लिग्नाइट और थर्मल कोल का मिलना क्षेत्र की समृद्ध भूगर्भीय संरचना का प्रमाण है। यह खोज राज्य के राजस्व में वृद्धि करेगी, स्थानीय रोजगार सृजित करेगी और औद्योगिक विकास को गति देगी। यदि कोयला खदान विकसित होती है, तो यह मध्य प्रदेश के लिए मील का पत्थर साबित होगी, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और कानूनी उत्खनन सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।

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