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,Katni new : कटनी नगर निगम की भारी चूक: एक ही दिन में एक महिला का जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी, दोनों का पंजीकरण क्रमांक भी एक!

कटनी: नगर निगम मुरवारा (कटनी) की जन्म-मृत्यु शाखा ने प्रशासनिक लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं। एक चौंकाने वाले मामले में, निगम ने एक ही महिला, ललिता देवी नायक, के नाम पर एक ही दिन में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए

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राहुल झा की रिपोर्ट
कटनी: नगर निगम मुरवारा (कटनी) की जन्म-मृत्यु शाखा ने प्रशासनिक लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं। एक चौंकाने वाले मामले में, निगम ने एक ही महिला, ललिता देवी नायक, के नाम पर एक ही दिन में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए, वह भी एक ही पंजीकरण क्रमांक (589) के साथ। यह गड़बड़ी 22 जुलाई 2025 को सामने आई, जब सुबह 11:43 बजे ललिता का जन्म प्रमाण पत्र और मात्र 43 मिनट बाद, दोपहर 12:26 बजे, उसी महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।
मामले का विवरण
जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार:
नाम: ललिता देवी नायक
पिता का नाम: गणेश प्रसाद नायक
जन्म तिथि: 17 दिसंबर 1994
जन्म स्थान: रावत गली, गांधी गंज, महात्मा गांधी वार्ड, कटनी
पंजीकरण क्रमांक: 589
जारी तिथि: 22 जुलाई 2025, 11:43:55
जारीकर्ता: नगर निगम मुरवारा, कटनी
इस प्रमाण पत्र में क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर मौजूद हैं, जो इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करते हैं।
मृत्यु प्रमाण पत्र का विवरण:
मृतक का नाम: ललिता देवी नायक
स्थायी पता: रावत गली, गांधी गंज, महात्मा गांधी वार्ड, कटनी
मृत्यु तिथि: 30 दिसंबर 1994
पंजीकरण क्रमांक: 589
जारी तिथि: 22 जुलाई 2025, 12:26:32


जारीकर्ता: नगर निगम मुरवारा, कटनी
यह प्रमाण पत्र भी क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी किया गया, जो इसकी वैधता को प्रमाणित करता है।
सवालों के घेरे में सिस्टम की विश्वसनीयता
यह गड़बड़ी तब और गंभीर हो जाती है, जब दोनों प्रमाण पत्रों में एक ही पंजीकरण क्रमांक और एक ही व्यक्ति का नाम दर्ज है। आश्चर्यजनक रूप से, जन्म और मृत्यु की तारीखें भी 1994 में दर्ज की गई हैं, जबकि प्रमाण पत्र 2025 में जारी किए गए। यह सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? क्या यह मानवीय भूल है, सिस्टम की खामी, या फिर जानबूझकर की गई गड़बड़ी?
क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर भी नहीं रोक पाए गलती
दोनों दस्तावेजों में क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर होने के बावजूद यह लापरवाही सामने आई है। ये तकनीकी उपाय दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए हैं, लेकिन इस मामले में इनका कोई असर नहीं दिखा। इससे नगर निगम के डिजिटल सिस्टम और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनता में आक्रोश, प्रशासन की चुप्पी
यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। नागरिकों का कहना है कि ऐसी गलतियां न केवल प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाती हैं, बल्कि आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं। अभी तक नगर निगम मुरवारा की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
क्या होगी कार्रवाई?
यह घटना मध्य प्रदेश शासन के आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग और नगर निगम मुरवारा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए ताकि जिम्मेदारों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोका जा सके।

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