बरगी व्यपवर्तन परियोजना: नर्मदा का पावन जल अब अंतिम चरण में, 2026 में कटनी-रीवा तक पहुंचने की उम्मीद!
अंतिम समय-सीमा तकनीकी स्थितियों पर निर्भर करेगी।)
अंतिम समय-सीमा तकनीकी स्थितियों पर निर्भर करेगी।)

बरगी व्यपवर्तन परियोजना: नर्मदा का पावन जल अब अंतिम चरण में, 2026 में कटनी-रीवा तक पहुंचने की उम्मीद!
मध्य प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई योजनाओं में शुमार बरगी व्यपवर्तन परियोजना अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। नर्मदा नदी के बरगी बांध से निकलने वाला पानी जल्द ही जबलपुर से होते हुए कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिलों तक पहुंचेगा, जिससे लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में जीवन रेखा बनेगी।
परियोजना का महत्वउद्देश्य: बरगी बांध से नहरों, पाइपलाइनों और अंडरग्राउंड टनल के माध्यम से नर्मदा जल को सूखा प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना।लाभ: कुल 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, जिसमें कटनी जिले में ही 44,333 हेक्टेयर (167 गांवों) को कवर किया जाएगा।
क्षेत्र: जबलपुर से शुरू होकर कटनी, मैहर, सतना और रीवा तक फैला 197 किमी लंबा नेटवर्क।वर्तमान प्रगति: बस थोड़ा सा काम बाकी!परियोजना की कुल प्रगति 98% से अधिक हो चुकी है। सबसे जटिल हिस्सा—स्लीमनाबाद (कटनी) में बन रही 11.95 किमी लंबी अंडरग्राउंड टनल—अब अंतिम चरण में है:अप-स्ट्रीम: 5.9 किमी पूरा।
डाउन-स्ट्रीम: 5.5 किमी पूरा।शेष: महज 400 मीटर खुदाई बाकी (कुछ रिपोर्टों में 563 मीटर का जिक्र, लेकिन नवीनतम अपडेट्स में 400 मीटर के करीब)।टनल NH-7, स्लीमनाबाद तालाब और आवासीय क्षेत्रों के नीचे से गुजर रही है।TBM मशीन (टनल बोरिंग मशीन) से कार्य तेजी से चल रहा है। यदि कोई नई तकनीकी बाधा नहीं आई, तो अप्रैल 2026 तक टनल की खुदाई पूरी हो जाएगी।
चुनौतियां और इतिहासशुरुआत: 2008 में।मूल लक्ष्य: 2013 तक पूरा होना था।देरी के कारण: तकनीकी समस्याएं, भूस्खलन, सिंक होल, विस्थापन और लागत वृद्धि।लागत: शुरुआती 799 करोड़ से बढ़कर अब 1,100 करोड़ से अधिक (कुछ हिस्सों में 1,432 करोड़ तक)।ठेकेदार: पटेल इंजीनियरिंग कंपनी।सरकार की मॉनिटरिंग और प्रतिबद्धतामुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद इस प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहे हैं।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि यदि सब ठीक रहा, तो 2026 में ही इन पांच जिलों को नर्मदा का जल मिलना शुरू हो जाएगा। बजट में भी प्राथमिकता दी गई है—2025-26 में 355 करोड़ का प्रावधान। साथ ही, संबंधित शाखा नहरों (जैसे विजयराघवगढ़, सतना-नागौद-रीवा) का काम भी तेजी से चल रहा है।
यह परियोजना न केवल किसानों के लिए वरदान साबित होगी, बल्कि पेयजल और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा देगी। 13 साल के लंबे इंतजार के बाद अब उम्मीद की किरण साफ नजर आ रही है—नर्मदा का जल जल्द ही इन क्षेत्रों की प्यास बुझाएगा!(नोट: जानकारी विभिन्न सरकारी और समाचार स्रोतों पर आधारित है;
अंतिम समय-सीमा तकनीकी स्थितियों पर निर्भर करेगी।)
