कटनी में आज पीपीपी मॉडल के खिलाफ जनाक्रोश चरम पर पहुंच गया, दोपहर शहर में पसरा रहा सन्नाटा
यह आंदोलन न केवल कटनी की स्वास्थ्य भविष्य की लड़ाई है, बल्कि PPP मॉडल के खिलाफ प्रदेशव्यापी बहस को भी तेज कर रहा है।
यह आंदोलन न केवल कटनी की स्वास्थ्य भविष्य की लड़ाई है, बल्कि PPP मॉडल के खिलाफ प्रदेशव्यापी बहस को भी तेज कर रहा है ।

कटनी में आज पीपीपी मॉडल के खिलाफ जनाक्रोश चरम पर पहुंच गया, दोपहर शहर में पसरा रहा सन्नाटा
‘कटनी 20 जनवरी 2026 को बंद’ के साथ ठप हो गया। स्थानीय निवासियों, व्यापारियों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर पूर्णतः सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा फैला दिया।
शहर बंद का व्यापक असरसुबह से ही मुख्य बाजार जैसे आजाद चौक, झंडा बाजार, गोल बाजार, सराफा बाजार, सुभाष चौक और कृषि उपज मंडी में दुकानें बंद रहीं। कई इलाकों में सन्नाटा पसरा रहा, जबकि बस स्टैंड और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में भी बंद का असर दिखा। प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे—”कटनी की एक ही मांग, पूर्णतः सरकारी मेडिकल कॉलेज” और “पीपीपी नहीं चलेगा”।
विभिन्न संगठनों ने इसे आर-पार की लड़ाई करार दिया है।विरोध की वजह क्या है?कटनीवासी लंबे समय से एक पूर्ण सरकारी मेडिकल कॉलेज की उम्मीद में थे, जो स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा को सुलभ बनाए। लेकिन राज्य सरकार के पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर इसे चलाने के फैसले ने लोगों में भारी असंतोष पैदा कर दिया। आंदोलनकारियों का तर्क है कि कटनी जैसे राजस्व देने वाले जिले को निजी भागीदारी के हवाले करना अन्याय है।
उनका कहना है कि PPP मॉडल से स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो सकती हैं और आम जनता के लिए पहुंच मुश्किल हो जाएगी।सियासी संदर्भ और भूमिपूजन की तैयारियांयह बंद ठीक उस समय हो रहा है, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के संभावित दौरे के दौरान मेडिकल कॉलेज के भूमिपूजन की तैयारियां चल रही हैं। सरकार इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बता रही है,
लेकिन जमीन पर जनता इसे निजीकरण थोपने की कोशिश मान रही है। पिछले दिनों भी काले झंडों, मशाल जुलूस और धरनों के जरिए विरोध व्यक्त किया गया था।जनभावनाएं साफप्रदर्शनकारियों में व्यापारी, छात्र, किसान, मजदूर और आम नागरिक शामिल हैं।
उनका एक स्वर है—कटनी को निजी हाथों में सौंपा गया मेडिकल कॉलेज नहीं, बल्कि पूरी तरह सरकारी नियंत्रण वाला कॉलेज चाहिए। बंद के दौरान कोई बड़ी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई, लेकिन जनाक्रोश की तीव्रता साफ झलक रही है।
यह आंदोलन न केवल कटनी की स्वास्थ्य भविष्य की लड़ाई है, बल्कि PPP मॉडल के खिलाफ प्रदेशव्यापी बहस को भी तेज कर रहा है।
