अमानक बीज बिक्री पर सख्त कार्रवाई: कटनी में सात विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित, कलेक्टर ने दी चेतावनी

कलेक्टर ने कहा, “किसानों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी

किसानों से धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं!

कटनी, 28 अगस्त 2025: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में किसानों को ठगने वाली अमानक बीज बिक्री के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।

कलेक्टर दिलीप कुमार यादव के सख्त निर्देशों पर सात बीज विक्रेताओं के विक्रय प्राधिकार पत्र (लाइसेंस) तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।

यह कार्रवाई प्रयोगशाला जांच में धान के बीजों को अमानक पाए जाने के बाद बीज गुण नियंत्रण आदेश 1983 की धारा 15 के तहत की गई है।इस कार्रवाई से प्रभावित विक्रेताओं में विकासखंड कटनी के चार, बड़वारा के दो तथा विजयराघवगढ़ ब्लॉक का एक विक्रेता शामिल है।

निलंबित विक्रेताओं की सूची में प्रमुख नाम हैं: सुहाने बीज भंडार, मौर्या सीड्स कंपनी, पटेल बीज भंडार, चौहान बीज भंडार, आरपी कृषि केंद्र, न्यू गुरूकृपा बीज भंडार और जनक नंदनी कृषि सेवा केंद्र। इन विक्रेताओं पर अमानक बीज बेचकर किसानों को नुकसान पहुंचाने का आरोप है, जो खरीफ सीजन के दौरान विशेष रूप से गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

कलेक्टर दिलीप कुमार यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि गुणवत्ताहीन खाद-बीज की बिक्री, कालाबाजारी, अवैध भंडारण तथा मिस ब्रांडिंग (गलत लेबलिंग) करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की जाए। उन्होंने संबंधित उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और कृषि विभाग के अधिकारियों को सख्त निगरानी का दायित्व सौंपा है।

कलेक्टर ने कहा, “किसानों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसान सुरक्षित और गुणवत्ता वाले बीज प्राप्त कर सकें।”यह कार्रवाई किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, खासकर जब धान जैसी प्रमुख फसल के बीजों की गुणवत्ता सीधे उत्पादन और आय को प्रभावित करती है।

जिला प्रशासन ने सभी बीज विक्रेताओं को चेतावनी जारी की है कि वे केवल प्रमाणित और मानक बीज ही बेचें। कृषि विभाग की टीम अब और अधिक जांच अभियान चला रही है, ताकि बाजार में अमानक उत्पादों की घुसपैठ रोकी जा सके।

कटनी जिले के किसान संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है और मांग की है कि ऐसी कार्रवाइयां नियमित रूप से हों, जिससे छोटे किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। प्रशासन का यह प्रयास न केवल स्थानीय स्तर पर प्रभावी साबित हो सकता है, बल्कि पूरे राज्य में बीज गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने का उदाहरण भी बनेगा।

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