google1b86b3abb3c98565.html

मध्य प्रदेश में सख्ती: 7 दिन बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर शिक्षकों की सेवा सीधे समाप्त, लोक शिक्षण विभाग का नया आदेश जारी

0

अब देखना यह है कि इस नए नियम का अमल कैसे होता है और क्या इससे स्कूलों में उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आता है।

अब देखना यह है कि इस नए नियम का अमल कैसे होता है और क्या इससे स्कूलों में उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आता है।

भोपाल (मध्य प्रदेश), मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब यदि कोई शिक्षक लगातार 7 दिन तक बिना पूर्व सूचना या स्वीकृत अवकाश के ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सेवा सीधे समाप्त की जा सकती है। लोक शिक्षण संस्थान विभाग के नए निर्देश ने शिक्षा महकमे में हलचल मचा दी है, जबकि शिक्षकों के बीच चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है।

आदेश की मुख्य बातेंलगातार 7 दिन बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर सेवा समाप्ति का प्रावधान।अनुपस्थिति की स्थिति में संबंधित सक्षम अधिकारी को पूर्व सूचना देना अनिवार्य।बिना सूचना गैरहाजिरी पाए जाने पर प्रकरण की जांच के बाद कार्रवाई।स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न होने के उद्देश्य से यह कदम।विभागीय सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से स्कूलों में शिक्षकों की लगातार अनुपस्थिति की शिकायतें मिल रही थीं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही थी।

इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए विभाग ने यह सख्त नीति अपनाई है।शिक्षा मंत्री का बयानस्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि “विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन मजबूत करना जरूरी है और अब ढिलाई नहीं चलेगी।”शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रियाजहां प्रशासन इसे व्यवस्था सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है, वहीं शिक्षक संगठनों ने इसे कठोर बताते हुए आपत्ति जताई है।

संगठनों का कहना है कि ऐसे प्रावधान में मानवीय पहलुओं (जैसे अचानक बीमारी, पारिवारिक आपातकाल आदि) को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने विभाग से स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने और जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष व पारदर्शी बनाने की मांग की है।यह फैसला राज्य के हजारों सरकारी स्कूल शिक्षकों के लिए चेतावनी भरा संदेश है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अब देखना यह है कि इस नए नियम का अमल कैसे होता है और क्या इससे स्कूलों में उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed