कटनी (11 अप्रैल 2026) — बरगी और बाणसागर परियोजनाओं से विस्थापित हुए सैकड़ों आदिवासियों ने अपनी पुश्तैनी जमीन और पुनर्वास का अधिकार मांगते हुए जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। विजयराघवगढ़ क्षेत्र से 70 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर कलेक्ट्रेट पहुंचे इस जत्थे में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे।राष्ट्रीय दलित महासभा इकाई कटनी के सहयोग से छोटू आदिवासी, दसई कोल, नन्दलाल कोल, धूप सिंह गोंड, अम्बे कोल, जुरूआ चौधरी और बबली चौधरी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने तेज धूप और बीच-बीच में हो रही बारिश का सामना करते हुए लंबा सफर तय किया।विस्थापितों की व्यथाग्रामीणों ने बताया कि वे वर्षों से बाणसागर परियोजना के डूब क्षेत्र के किनारे रह रहे थे। परियोजना पूर्ण होने के बाद उन्हें उनकी जमीन से बेदखल कर दिया गया, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई वैकल्पिक भूमि या उचित पुनर्वास नहीं दिया गया। लंबे समय से काबिज होने के बावजूद उन्हें भूमि पट्टे नहीं मिले और विस्थापन नीति भी प्रभावी रूप से लागू नहीं की गई।
एक प्रदर्शनकारी छोटू आदिवासी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा,“हम अपनी ही जमीन पर बेगाने हो गए हैं। न खेती के लिए जमीन है, न रहने के लिए सुरक्षित घर। प्रशासन सिर्फ आश्वासन देता है, लेकिन धरातल पर हमारे पास अब कुछ नहीं बचा। बारिश के मौसम में बाणसागर का पानी हमारे घरों में घुस जाता है, जिससे परेशानियां और बढ़ जाती हैं।”प्रदर्शन और मांगेंकलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर पहुंचकर आदिवासियों ने बैनर-पोस्टर लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और कुछ देर के लिए सड़क जाम कर दिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि:विस्थापित परिवारों को रहने के लिए पट्टे और खेती के लिए उपयुक्त भूमि तत्काल आवंटित की जाए।पुनर्वास नीति के तहत उचित मुआवजा और सुविधाएं प्रदान की जाएं।प्रदर्शन में शामिल कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर अपनी गंवाई हुई जमीन और आवास के लिए गुहार लगा रही थीं।यह प्रदर्शन बरगी-बाणसागर जैसी बड़ी जल परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी परिवारों के लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को एक बार फिर उजागर करता है।
स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर संज्ञान लेने का आश्वासन दिया है।
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