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विजयराघवगढ़ कटनी समाचार :विजयराघवगढ़ के जंगल पुरैनी में 70 एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा, प्रशासन की चुप्पी से ग्रामीणों में आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप: लाखन सिंह रघुवंशी ने किया अवैध कब्जा

ग्रामीणों का आरोप: लाखन सिंह रघुवंशी ने किया अवैध कब्जा

विजयराघवगढ़ के जंगल पुरैनी में 70 एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा,

प्रशासन की चुप्पी से ग्रामीणों में आक्रोश

कटनी, दैनिक महत्वपूर्णजिले में सरकारी तंत्र की मिलीभगत से शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

ताजा मामला विजयराघवगढ़ तहसील के ग्राम जंगल पुरैनी से सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने लगभग 70 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा कर लिया है। ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने न तो कोई कार्रवाई की और न ही मौके का मुआयना किया, जिससे स्थानीय लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।

ग्रामीणों का आरोप: लाखन सिंह रघुवंशी ने किया अवैध कब्जा

जंगल पुरैनी निवासी उमेश कुमार शिवहरे, विपिन, अवधेश, विनय और चंद्रभान यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि खसरा नंबर 34, 35, 40, और 41/04 की लगभग 70 एकड़ शासकीय भूमि पर लाखन सिंह रघुवंशी ने फेंसिंग कर अवैध कब्जा किया है।

इस कब्जे के कारण किसानों को अपने खेतों तक ट्रैक्टर, थ्रेशर और अन्य कृषि उपकरण ले जाने में भारी परेशानी हो रही है। साथ ही, पशुओं के आवारा घूमने से फसलों को नुकसान पहुंच रहा है।वृक्षारोपण का आवेदन भी बेअसर

ग्रामीणों ने इस शासकीय भूमि पर पंचायत के माध्यम से वृक्षारोपण करने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन यह प्रयास भी निष्फल रहा।

ग्राम पंचायत, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम), और तहसीलदार को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की इस उदासीनता से उनका विश्वास टूट रहा है, और उनकी कृषि गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी तंत्र की निष्क्रियता के कारण अवैध कब्जे को बढ़ावा मिल रहा है।

इस मामले में न तो कोई जांच हुई और न ही कब्जा हटाने की दिशा में कोई कदम उठाया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि शासकीय भूमि को मुक्त कराया जाए और किसानों की समस्याओं का समाधान हो सके।

प्रशासन से मांगग्रामीणों ने मांग की है कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा तुरंत हटाया जाए और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

साथ ही, इस भूमि पर वृक्षारोपण और अन्य सामुदायिक कार्यों को बढ़ावा देने की अनुमति दी जाए।

यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

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