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विजयराघवगढ़ के कारी तलाई की स्थानीय नागरिकों ने विकास की मांग की है। जिले के विजयराघवगढ़ के कारी तलाई का स्थानीय लोगों के बार-बार मांग के भी विकास नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से इस संबंध में प्रय़ास किए जाने की मांग की है ताकि इस पर्यटन स्थल विकास किया जा सके। नागरिकों में स्वमेय पटेल, रुंजन सिंह, कामला यादव सहित अन्य ने बताया कि यह स्थान जिला मुख्यालय से महज 42 किलोमीटर दूर स्थित है ग्राम कारीतलाई। यहां पर 5वीं सदी का भगवान विष्णु वाराह का सबसे अद्भुत मंदिर है। यहां पर कल्चुरी, बौद्ध, जैन, गुप्तकालीन सहित अन्य काल की जानकारी मिलती है। मूर्तिकला का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। खुदाई में यहां बहुत शिलालेख मिले हैं जो आज भी रायपुर संग्राहालय, रानीदुर्गावती संग्राहालय जबलपुर, ग्वालियर सहित विदेशों में संरक्षित हैं। नागरिकों ने बताया कि यहां पर कल्चुरी महाराज लक्ष्मण राज के मंत्री भट्ट सोमेश्वर दीक्षित द्वारा विष्णु वाराह का मंदिर बनाए जाने के शिलालेख मिले हैं। 1897 की है श्वेत नरसिंह अवतार की प्रतिमा है। कारीतलाई 493 ईस्वी के अवशेष विद्यमान हैं। गोड़ों की प्राचनी बस्ती, विस्तीर्ण तालाब, प्राचीन पाठशाला, स्मारक, संग्रहालय शोभा बढ़ा रही हैं।
विजयराघवगढ़ के वार्ड क्रमांक दो में बजरी की जगह डाल दी मिट्टी नागरिक परेशान
पाइप लाइन के पानी से परेशानी
विजयराघवगढ़ नगर परिषद के वार्ड क्रमांक दो के नागरिक बेहद परेशान हो रहे है। दरअसल नल जल योजना के वार्ड में पाइपलाइन डाली गई है। जिससे सडक पूरी तरह खराब हो गई थी। जिसके लिए वार्डवासियों ने कीचड़ से राहत पाने के लिए पार्षद से शिकायत की और बजरी डालने के लिए बोला गया था, लेकिन यहां बजरी की जगह मिट्टी डाल दी गई है। अब बारिश होने पर बजरी मिट्टी में गायब हो गई है, जिससे कीचड मच रहा है। जिससे राहगीरों व वाहन चालकों को निकालने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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