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मुड़वारा तहसील अंतर्गत ग्राम पोंडी में सरकारी चरनोई भूमि पर किड्स केयर स्कूल पर अतिक्रमण का आरोप, ग्रामीणों ने की शिकायत

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ग्रामीणों को लगता है कि जनहित की संपत्ति की रक्षा में प्रशासन की भूमिका कमजोर पड़ रही है।

ग्रामीणों को लगता है कि जनहित की संपत्ति की रक्षा में प्रशासन की भूमिका कमजोर पड़ रही है।

कटनी जिले के मुड़वारा तहसील अंतर्गत ग्राम पोंडी में सरकारी चरनोई भूमि पर निजी स्कूल द्वारा किए गए अतिक्रमण का मामला गरमा गया है। न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद अवैध कब्जा अभी तक नहीं हटाया गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।ग्राम पोंडी की शासकीय चरनोई भूमि, खसरा नंबर 204 पर ‘किड्स केयर पब्लिक स्कूल’ के संचालकों डॉ. डी.के. खरे और ममता खरे पर अवैध कब्जे का आरोप है।

शिकायतकर्ता आदर्श पांडे ने कलेक्टर आशीष तिवारी को ज्ञापन सौंपकर इसकी शिकायत की है। ज्ञापन में बताया गया है कि स्कूल संचालकों ने सरकारी जमीन की घेराबंदी कर पक्की बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी है।न्यायालय का आदेश और निष्क्रियतापूर्व में नायब तहसीलदार मुड़वारा-2 की अदालत में सुनवाई के बाद अतिक्रमण की पुष्टि हुई थी। अदालत ने स्कूल संचालकों पर 2000 रुपये का अर्थदंड लगाते हुए एक सप्ताह के भीतर अवैध कब्जा हटाने का सख्त आदेश दिया था।

हालांकि, आदेश की समय-सीमा बीतने के कई दिनों बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। न तो स्कूल संचालकों ने खुद कब्जा हटाया और न ही राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बेदखली की।ग्रामीणों की मांग और रोषग्रामीणों का आरोप है कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना के बावजूद अधिकारियों की निष्क्रियता से संदेह पैदा हो रहा है। वे तत्काल मांग कर रहे हैं कि:सरकारी चरनोई भूमि से अवैध निर्माण तुरंत ढहाया जाए।आदेश की अवहेलना करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।

भूमि को पुनः ग्राम पंचायत के अधीन किया जाए।स्कूल संचालक का पक्षस्कूल संचालक डॉ. डी.के. खरे ने दावा किया है कि यह बच्चों के खेल के मैदान से संबंधित मामला है। नायब तहसीलदार के आदेश के बाद उन्होंने सिविल कोर्ट से स्थगन (स्टे) आदेश प्राप्त कर लिया है और मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।प्रशासन की प्रतिक्रियाकलेक्टर कार्यालय ने शिकायत को संज्ञान में ले लिया है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।यह घटना सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और न्यायिक आदेशों की अवहेलना के मुद्दे को फिर से उजागर करती है, जहां

ग्रामीणों को लगता है कि जनहित की संपत्ति की रक्षा में प्रशासन की भूमिका कमजोर पड़ रही है।

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