Katni : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कटनी और शहडोल जिलों की रेत खदानों के टेंडर रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को ठहराया वैध
राज्य सरकार अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर सकती है, ताकि राजस्व सुरक्षित रहे और विकास कार्य प्रभावित न हों
राज्य सरकार अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर सकती है, ताकि राजस्व सुरक्षित रहे और विकास कार्य प्रभावित न हों

कटनी।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कटनी और शहडोल जिलों की रेत खदानों के टेंडर रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को वैध ठहराया है। यह बड़ा फैसला कंपनियों की चालाकी पर लगाम लगाने वाला साबित हुआ है।
हाईकोर्ट ने सरकार का पक्ष मजबूत कियाजबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ) ने मुंबई की साहाकार ग्लोबल लिमिटेड और होशंगाबाद की धनलक्ष्मी मर्चेन्डाइज की याचिकाएं खारिज कर दीं।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकार के निर्णय में हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह जनहित और पारदर्शिता पर आधारित था।
क्या था पूरा मामला?कंपनियों ने पहले उच्च बोली लगाकर टेंडर हासिल किए, लेकिन बाद में ठेके छोड़ दिए।
नए टेंडर में वही कंपनियां बहुत कम बोली लगाकर फिर शामिल हुईं।सरकार को संदेह हुआ कि यह एक सुनियोजित रणनीति है, जिससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो सकता था।
संभावित नुकसान का आंकड़ाअदालत में बताया गया कि एक खदान में करीब 10 करोड़ रुपये और दूसरी में 20 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की आशंका थी।
स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन ने 19 नवंबर 2025 को अपनी बैठक में सभी पहलुओं पर विचार कर टेंडर रद्द करने का फैसला लिया।अदालत की प्रमुख टिप्पणियांकम बोली से सरकार को नुकसान की आशंका सही थी, और सरकार ने समय रहते इसे पहचान लिया।
जब कोई प्रक्रिया से सार्वजनिक धन को खतरा हो, तो सरकार टेंडर रोक या बदल सकती है।निर्णय पारदर्शी और जनहित में था।कंपनियों को मिली छोटी राहतयाचिकाएं खारिज होने के बावजूद, अदालत ने कंपनियों को भविष्य में जारी होने वाली नई निविदाओं में भाग लेने की छूट दी है।
यह फैसला रेत खनन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सरकारी प्रक्रियाओं की मजबूती और कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगाने का संदेश देता है।
राज्य सरकार अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर सकती है, ताकि राजस्व सुरक्षित रहे और विकास कार्य प्रभावित न हों।
