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कटनी: शासकीय नाले पर कब्जा करने वाला अवैध किला ढहा, रपटा नाले से अतिक्रमण पूरी तरह साफ, बुलडोजर ने तोड़ी हठ की दीवार।

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यह कार्रवाई एनजीटी के दिशा-निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है

यह कार्रवाई एनजीटी के दिशा-निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है

कटनी: शासकीय नाले पर कब्जा करने वाला अवैध किला ढहा, रपटा नाले से अतिक्रमण पूरी तरह साफ, बुलडोजर ने तोड़ी हठ की दीवार।

जिले में शासकीय भूमि और प्राकृतिक जल स्रोतों पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। ग्राम खिरहनी स्थित रपटा नाले पर बनी अवैध रिटेनिंग बाउंड्री वॉल को आज प्रशासन ने जेसीबी और बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया।

कलेक्टर न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद भारी प्रशासनिक अमला और पुलिस बल के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया गया।कार्रवाई का विवरणमौके पर तहसीलदार, पटवारी, नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता और NKJ थाने का पुलिस बल तैनात रहा।

सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजस्व अधिकारियों की निगरानी में मशीनों ने अवैध बाउंड्री वॉल को तोड़ना शुरू किया। यह निर्माण प्राकृतिक बरसाती नाले की भूमि पर किया गया था, जिससे नाले का जल प्रवाह पूरी तरह बाधित हो रहा था और नाले के स्वरूप में गंभीर छेड़छाड़ हुई थी।

कलेक्टर आशीष तिवारी के न्यायालय ने आरोपी की अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद प्रशासन ने बिना किसी देरी के कार्रवाई शुरू की।

पुराना विवाद और राजस्व रिकॉर्डपुराने राजस्व अभिलेखों में यह भूमि शासकीय पानी मद और नाला के रूप में दर्ज है। वर्तमान कम्प्यूटर खसरा में खसरा नंबर 553/2/1, 553/3/1, 553/3/2, 553/6 (रकबा 0.660, 0.607, 0.144, 0.442 हेक्टेयर) प्रवीण बजाज (पिता सत्यनारायण बजाज) के नाम पर दर्ज है, लेकिन भूमि स्वामी हक की इस जमीन पर कांक्रीट की रिटेनिंग बाउंड्री वॉल बनाकर नाले (खसरा नंबर 442) का प्राकृतिक बहाव रोका जा रहा था।

मौका मुआयना में पाया गया कि मुख्य सड़क के दक्षिण की ओर पुराना पुल है और बाउंड्री वॉल ने नाले को प्रभावित कर दिया था। इससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा बढ़ गया था।

प्रशासन का सख्त संदेशअधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति के नाले, नदी या शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह अवैध है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

इस एक्शन को प्रशासन का साफ संदेश माना जा रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों और सरकारी जमीन पर कब्जा अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामले में लापरवाही की भी अलग से जांच चल रही है।यह कार्रवाई एनजीटी के दिशा-निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

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