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कहाँ गई जांच टीम? कहाँ गुम हुआ लाल पहाड़ी का रिपोर्ट? कटनी प्रशासन पर उठे सवाल

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जनता की मांग है— तुरंत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और लाल पहाड़ी को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

जनता की मांग है— तुरंत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और लाल पहाड़ी को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

कटनी। शहर के ठीक बीचोंबीच स्थित अरबों रुपये की बेशकीमती सरकारी संपत्ति लाल पहाड़ी पर भूमाफियाओं की नजर लगी हुई है। खुलेआम अतिक्रमण और सरकारी जमीन को निजी नामों पर ट्रांसफर करने के खेल के बीच जनवरी 2026 में प्रशासन ने अचानक हरकत दिखाई थी।कलेक्टर के आदेश पर तत्कालीन एसडीएम प्रमोद चतुर्वेदी ने लाल पहाड़ी का सीमांकन और अतिक्रमण की जांच के लिए एक विशेष दल गठित किया। दल को महज सात दिनों के अंदर पुराने राजस्व रिकॉर्ड से मिलान कर पूरी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अब चार महीने बाद भी न तो जांच टीम का कोई अता-पता है, न ही जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक हुआ है।

कटनीवासी सवाल पूछ रहे हैं—”कहाँ गई वो टीम? कहाँ गया वो जांच रिपोर्ट? आखिर कौन करेगा लाल पहाड़ी की सच्ची जांच?”सरकारी रिकॉर्ड क्या कहता है?मिसल रिकॉर्ड 1906-07 के अनुसार, ग्राम बरगवां के खसरा नंबर 209, रकबा 69.55 एकड़ पूरी तरह सरकारी पहाड़ दर्ज है। समय के साथ शहर के बीच होने के कारण इस पर कब्जे और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के प्रयास लगातार होते रहे।वर्तमान में खसरा 209 में कुछ बंटवारे दर्ज हैं, जिनमें खसरा 209/5 (लगभग 0.2630 हेक्टेयर या 28,300 वर्गफीट) कुछ निजी व्यक्तियों के नाम पर आ गया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी पहाड़ी का हिस्सा प्राइवेट नामों पर कैसे, कब और किसके आदेश पर दर्ज हुआ, इसका कोई स्पष्ट उल्लेख राजस्व रिकॉर्ड में नहीं मिलता।अब एक बार फिर पहाड़ी से सटे इलाकों में अतिक्रमण तेज हो गया है, जिसके बाद प्रशासन को फिर से अलर्ट होना पड़ा था।जांच दल में कौन-कौन शामिल थे?एसडीएम प्रमोद चतुर्वेदी द्वारा गठित जांच दल में शामिल थे:प्रभारी नायब तहसीलदार हर्ष रामटेकेराजस्व निरीक्षक सीएस कोरीपटवारी धर्मेंद्र ताम्रकारपटवारी संदीप गर्गउस समय एसडीएम ने स्पष्ट कहा था कि पुराने राजस्व अभिलेखों से मिलान किया जाएगा

और अगर सरकारी भूमि निजी रिकॉर्ड में आई है, तो यह किसके आदेश पर हुआ— इसकी गहन जांच होगी।अब सवाल ये हैं…क्या जांच दल ने वाकई सात दिनों में अपना काम पूरा किया?रिपोर्ट कलेक्टर या उच्च अधिकारियों को सौंपी गई या नहीं?अगर रिपोर्ट तैयार हो गई, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?अतिक्रमण और भूमि हेराफेरी के खिलाफ अब क्या ठोस कार्रवाई हो रही है?कटनी की जनता अब प्रशासन से जवाब मांग रही है कि लाल पहाड़ी जैसी बहुमूल्य सरकारी संपत्ति को भूमाफियाओं के हवाले होने से बचाने के लिए ठोस और पारदर्शी कदम कब उठाए जाएंगे।

जनता की मांग है— तुरंत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और लाल पहाड़ी को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

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