कटनी, 16 अक्टूबर 2025: दीपावली की रौनक में बाजारों की चमक के साथ-साथ मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है, लेकिन इस बार कोतवाली पुलिस की ‘जल्दबाजी’ ने खाद्य सुरक्षा की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
बुधवार को चांडक चौक से जब्त करीब 1 क्विंटल मिठाई (पेड़ा, बर्फी, सोनपपड़ी आदि) को लैब जांच से पहले ही ‘मिलावटी’ घोषित कर प्रेस रिलीज जारी कर दी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह न केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उपभोक्ताओं और व्यापारियों के बीच भ्रम भी पैदा करता है
घटना के अनुसार, कोतवाली पुलिस ने बस स्टैंड से माधवनगर की ओर जा रहे ई-रिक्शा चालक राहुल जायसवाल को संदिग्ध पाया।
चालक मिठाई से लदे कार्टून लेकर जा रहा था, लेकिन पूछताछ में वह स्रोत और गंतव्य के बारे में स्पष्ट जवाब नहीं दे सका। पुलिस ने तत्काल मिठाई जब्त कर फूड इंस्पेक्टर ओ.पी. साहू को जांच के लिए सौंप दी। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, सैंपल लैब भेजने के कुछ ही घंटों बाद प्रेस रिलीज जारी हो गई, जिसमें मिठाई को सीधे ‘मिलावटी’ करार दे दिया गया।
प्रेस रिलीज में थाना प्रभारी निरीक्षक राखी पांडेय का नाम प्रमुखता से उल्लेखित है, साथ ही पूरे स्टाफ की ‘विशेष भूमिका’ का ब्योरा दिया गया—सउनि विजय गिरी, प्र.आर. वीरेंद्र तिवारी, आर. अजय प्रताप सिंह, अमित सिंह, मंसूर हुसैन, मोहन मंडलोई और दिनेश सेन सहित।
यह रिलीज न केवल कार्रवाई का श्रेय लेने का प्रयास लगती है, बल्कि बिना वैज्ञानिक आधार के निष्कर्ष भी निकालती है।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSA) के तहत, मिलावट की पुष्टि केवल लैब रिपोर्ट से ही संभव है। पुलिस का कार्य मात्र संदिग्ध सामग्री जब्त कर विभाग को सौंपना है, न कि जांच से पहले ‘मिलावटी’ का लेबल चस्पां करना।
स्थानीय व्यापारी संगठन के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने कहा, “यह जल्दबाजी से न केवल निर्दोष व्यापारियों का नुकसान होता है, बल्कि त्योहार सीजन में बाजार की छवि खराब होती है।
उपभोक्ता डरेंगे, और बिक्री प्रभावित होगी।” खाद्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पुलिस का हस्तक्षेप प्रक्रिया को कमजोर करता है; रिपोर्ट आने तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।
“फिलहाल, मिठाई के सैंपल फूड लैब भेजे जा चुके हैं। अब सवाल यह है कि रिपोर्ट क्या कहती है—क्या मिठाई वाकई मिलावटी निकलेगी, या पुलिस की ‘क्रेडिट लेने की होड़’ ने बिना आधार के प्रचार कर दिया? कटनी जैसे शहरों में जहां त्योहारों पर स्थानीय मिठाई का बाजार करोड़ों का होता है, ऐसी घटनाएं निगरानी को मजबूत करने के बजाय अविश्वास पैदा करती हैं।
जिला प्रशासन से इसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है, ताकि भविष्य में प्रक्रिया पारदर्शी बने।
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