कटनी कोर्ट में साजिश का पर्दाफाश: मिथ्या कथन और झूठे साक्ष्य देने के आरोप में दो आरोपियों को 6-6 महीने की सश्रम कैद

नोट: आरोपीयों को सजा के साथ ही अर्थदंड भी देना होगा। यदि वे अपील करते हैं तो उच्च न्यायालय में मामले की आगे सुनवाई हो सकती है।

कटनी, 8 अप्रैल 2026 — जिला कटनी की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत ने एक पुराने सिविल वाद में मिथ्या कथन (false statement) और मिथ्या साक्ष्य देने की साजिश के मामले में दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। दोनों को प्रत्‍येक धारा में 6 महीने की सश्रम कारावास और 2000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।दोषी ठहराए गए आरोपी हैं:

संजय सेंगर (पिता: सी.एस. सेंगर, उम्र लगभग 52 वर्ष, निवासी संजीवनी नगर, गढ़ा, जबलपुर)रफीक खान (पिता: आर. खान, उम्र लगभग 54 वर्ष, निवासी छोटी बजरिया, गढ़ा, जबलपुर)यह फैसला दांडिक प्रकरण क्रमांक 787/2009 में 7 अप्रैल 2026 को सुनाया गया।

अदालत ने आरोपीयों को धारा 193 (मिथ्या साक्ष्य देना) व धारा 205 (झूठा दावा पेश करना) के साथ धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) भादवि के तहत दोषी पाया।मामले का संक्षिप्त विवरणवर्ष 2005 में आरोपीयों (संजय सेंगर, रफीक खान सहित अन्य) ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कटनी के समक्ष व्यवहारवाद क्रमांक 5-अ/2005 दायर किया था। इसमें घोषणा और स्थाई निषेधाज्ञा की मांग की गई थी।

उन्होंने मेसर्स डॉल्टन इम्पेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (कोलकाता) की भूमि को लेकर दावा किया और कुलदीप नामक व्यक्ति को कंपनी का केयर टेकर बताते हुए अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त कर ली।बाद में कंपनी ने अदालत में हाजिर होकर स्पष्ट किया कि कुलदीप उनका कोई प्रतिनिधि या केयर टेकर नहीं है। आरोपियों ने झूठे शपथ-पत्र और मिथ्या कथन के जरिए अदालत को गुमराह किया और साजिश रचकर अस्थाई निषेधाज्ञा हासिल की।कंपनी की शिकायत पर अदालत ने धारा 340 CrPC के तहत जांच शुरू की।

उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद अंततः मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 17 जून 2009 को आरोपीयों के विरुद्ध धारा 193 और 205 भादवि के तहत संज्ञान लिया। लंबे विचारण के दौरान सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्रीमती ज्योति झारिया ने मजबूत साक्ष्य और दस्तावेज पेश किए, जिसके आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

मीडिया सेल प्रभारी श्री सुरेंद्र गर्ग ने बताया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष की सशक्त पैरवी से न्याय मिला है। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में मिथ्या कथन और साजिश के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।

नोट: आरोपीयों को सजा के साथ ही अर्थदंड भी देना होगा। यदि वे अपील करते हैं तो उच्च न्यायालय में मामले की आगे सुनवाई हो सकती है।

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