कटनी। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में नगर निगम की जलापूर्ति लाइन में सीवेज मिश्रण से दूषित पानी की वजह से हुई मौतों ने मध्य प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है।
इस मुद्दे पर रविवार को कटनी में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जोरदार आमना-सामना हुआ। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुड़वारा विधायक संदीप जायसवाल के निवास का घेराव किया, जिस दौरान दोनों पक्षों में नोकझोंक, नारेबाजी और धक्का-मुक्की हुई।
स्थिति करीब दो घंटे तक तनावपूर्ण रही, अंततः पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया।प्रदर्शन का विवरणदोपहर में शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित शुक्ला, युवा कांग्रेस महासचिव दिव्यांशु मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता विधायक निवास पहुंचे।
कार्यकर्ता हाथों में घंटे लेकर आए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। जवाब में भाजपा समर्थकों ने निवास पर बड़े साउंड सिस्टम से आरती व धार्मिक भजन बजाए, जिससे माहौल और गरमा गया।
दोनों ओर से घंटों की आवाज और भजनों के बीच धक्का-मुक्की हुई।कांग्रेस नेता अमित शुक्ला ने कहा कि वे इंदौर की त्रासदी पर शांतिपूर्ण संवाद के लिए आए थे, लेकिन विधायक ने लाउडस्पीकर से उनकी आवाज दबाने की कोशिश की।
युवा कांग्रेस नेता दिव्यांशु मिश्रा ने भाजपा पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इंदौर में लोग दूषित पानी से मर रहे हैं, जबकि भाजपा भ्रष्टाचार छिपाने के लिए धार्मिक आडंबर कर रही है।
उन्होंने कटनी की सीवर लाइन व जल व्यवस्था में भी विधायक और महापौर पर मिलीभगत व कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए।
भाजपा का पक्ष
विधायक संदीप जायसवाल ने कांग्रेस के आरोप खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन की कोई पूर्व सूचना नहीं थी। उन्होंने ‘घंटा’ को मंदिर व भक्ति से जुड़ी पवित्र वस्तु बताया और सड़क पर बजाना अनुचित करार दिया।
विधायक के मुताबिक, कांग्रेस के घंटा लेकर आने की जानकारी पर उन्होंने भगवान राम की तस्वीर रखी ताकि इसे उचित स्थान पर बजाया जा सके। जल व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
हंगामे के दौरान कोतवाली सहित कई थानों की पुलिस मौके पर तैनात रही। तहसीलदार के अनुसार कांग्रेस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सूचना दी थी, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर हस्तक्षेप आवश्यक हुआ। फिलहाल क्षेत्र में शांति है और पुलिस निगरानी बनाए हुए है।
पृष्ठभूमि: ‘घंटा’ बयान से उपजा विवाद
यह विवाद इंदौर जल संकट के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के कथित आपत्तिजनक बयान से और भड़का, जिसमें मीडिया के सवाल पर उन्होंने ‘घंटा’ जैसे शब्द का प्रयोग किया (बाद में माफी मांगी)।
कांग्रेस ने इसे असंवेदनशील बताकर सार्वजनिक माफी और कार्रवाई की मांग की है, जबकि भाजपा इसे तोड़-मरोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करार दे रही है।
इंदौर में दूषित पानी से अब तक 10-15 मौतें और सैकड़ों लोग बीमार होने की रिपोर्टें हैं। सरकार ने जांच समिति गठित की, अधिकारियों को निलंबित किया और मुआवजा घोषित किया है, लेकिन विपक्ष इसे प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार का प्रतीक बता रहा है।
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