कटनी: शहर के बरगवां क्षेत्र में स्थित लाल पहाड़ी पर लंबे समय से चला आ रहा भूमि स्वामित्व का विवाद एक बार फिर गहरा गया है।
इस क्षेत्र की जमीनों के रिकॉर्ड अस्पष्ट होने के कारण सरकारी और निजी संपत्ति की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है, जिससे कई मामले न्यायालयों में लंबित हैं।
हाल ही में एलआईसी कार्यालय से सटी करीब 25 हजार वर्ग फीट की बेशकीमती जमीन पर सीमेंट की बाउंड्री वॉल बनाने का काम शुरू हुआ है।
दावेदारों का कहना है कि यह जमीन निजी है, अब तक खाली पड़ी थी और अब इसका उपयोग करने के लिए इसे सुरक्षित किया जा रहा है।लेकिन स्थानीय लोगों में इस कार्य को लेकर गहरा संदेह है।
मुख्य सवाल यह है कि यदि जमीन पूरी तरह निजी है और सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो बाउंड्री निर्माण का काम आधी रात को क्यों कराया जा रहा है?
दिन में मौके पर कोई नहीं मिलता, जबकि रात के अंधेरे में मजदूर काम करते दिखाई देते हैं।लाल पहाड़ी क्षेत्र में पहले भी कई स्थानों पर अवैध कब्जे के मामले सामने आए हैं।
कब्जेदारों ने बाद में अदालत में मामले दायर कर स्टे ऑर्डर प्राप्त कर लिया और अब निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड की अस्पष्टता का लाभ उठाकर सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिशें हो रही हैं।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि लाल पहाड़ी का पूरा क्षेत्र सर्वे कराया जाए, सीमांकन किया जाए और सरकारी जमीन को संरक्षित किया जाए – ठीक वैसे ही जैसे निजी दावेदार बाउंड्री बनाकर जमीन घेर रहे हैं।
इस मामले में जिला कलेक्टर से त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है। प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
यदि समय पर हस्तक्षेप नहीं हुआ तो विवाद और उलझ सकता है।
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