त्वरित टिप्पणी कटनी: चाकू की धार पर लटका शांति का शहर कटनी कभी शांतिप्रिय कहे जाने वाले इस छोटे से शहर की सडक़ें अब चाकू की चमक से डरने लगी हैं

शहर की शांति अब हमारे हाथ में नहीं, हमारे गुस्से की धार पर लटक रही है। इसे बचाना है तो पहले खुद को बचाना होगा अपने गुस्से से, अपनी जल्दबाजी से, और सबसे बढक़र अपनी मानवता से

त्वरित टिप्पणी

कटनी: चाकू की धार पर लटका शांति का शहर कटनी कभी शांतिप्रिय कहे जाने वाले इस छोटे से शहर की सडक़ें अब चाकू की चमक से डरने लगी हैं।

24 घंटे के भीतर तीन चाकूबाजी की घटनाएँ। यह कोई साधारण अपराध की खबर नहीं, बल्कि एक खतरनाक सामाजिक रुझान का आईना है। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि एक हमलावर ने सीधे प्राइवेट पार्ट को निशाना बनाया।

यह सिर्फ हिंसा नहीं, एक तरह का विकृत बदला और मानसिक पतन का प्रदर्शन है।पहली घटना रंगनाथ थाना क्षेत्र की। दूसरी घटना झंडा बाजार की। तीसरी वारदात रेलवे स्टेशन के बाहर की।

वह जगह जहां दिन-रात हजारों लोग आते-जाते हैं। तीन अलग-अलग जगहें, तीन अलग मकसद, लेकिन हथियार एक ही चाकू।यह कोई संयोग नहीं है। यह हमारी सामाजिक संरचना में गहरे बैठ गए गुस्से, असहिष्णुता और त्वरित न्याय की विकृत भावना का परिणाम है।

आज का युवा बात-बात पर जेब से चाकू निकाल लेता है, क्योंकि उसे लगता है कि कानून धीमा है और उसका अपमान तुरंत धोना चाहिए। रिश्ते टूटते हैं तो सबूत की जरूरत नहीं, सिर्फ शक काफी है।

प्रेम, विश्वास और संवाद की जगह अब चाकू ने ले ली है। सबसे दुखद यह कि चाकू अब सिर्फ हथियार नहीं रहा, वह एक संदेश बन गया है अपमान का जवाब अपमान से, शक का जवाब खून से।

प्राइवेट पार्ट पर वार करना कोई शारीरिक चोट नहीं, यह पीड़ित को जिंदगी भर के लिए सामाजिक और मानसिक रूप से अपंग बनाने की कोशिश है। यह मर्दानगी की बीमार परिभाषा है जो हमारे समाज में धीरे-धीरे जहर घोल रही है।

प्रशासन के लिए यह चेतावनी है। चाकूबाजी की इन घटनाओं में ज्यादातर आरोपी स्थानीय ही हैं, ज्यादातर मामले आपसी रंजिश के हैं और ज्यादातर हमलावरों की उम्र 20-35 के बीच है।

यानी हमारा अपना युवा वर्ग ही हिंसा की इस भाषा को बोलने लगा है। अगर अभी नहीं चेते तो कल को ये चाकू किसी अपने के सीने में भी उतर सकता है।

कटनी को फिर से शांति का शहर बनाने के लिए पुलिस की सख्ती जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है हमारा खुद का आत्म-निरीक्षण।

चाकू जेब में रखने से पहले एक बार सोचिए क्या हम वाकई इतने कमजोर हो गए हैं कि दो मिनट की बहस को जिंदगी भर का दाग बनाने को तैयार हैं?

शहर की शांति अब हमारे हाथ में नहीं, हमारे गुस्से की धार पर लटक रही है। इसे बचाना है तो पहले खुद को बचाना होगा अपने गुस्से से, अपनी जल्दबाजी से, और सबसे बढक़र अपनी मानवता से।

admin

Recent Posts

नामांकन मैपिंग में सुस्ती पर सख्त कार्रवाई: दो बीआरसी की वेतन वृद्धि रोकी गईजिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने शिक्षा विभाग को दिए सख्त निर्देश

उपस्थित अधिकारीबैठक में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश अग्रहरि, जिला परियोजना समन्वयक प्रेम नारायण तिवारी, विकासखंड…

3 minutes ago

बरनमहगवां बनेगा पोषण और महिला सशक्तिकरण का आदर्श मॉडल ग्रामकलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने की चौपाल, लापरवाह पशु चिकित्सा अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई

उपस्थित अधिकारीइस दौरान विजयराघवगढ़ एसडीएम श्री विवेक गुप्ता, उपसंचालक पशुपालन डॉ. आर.के. सोनी, उपसंचालक खनिज…

10 minutes ago

अमृत योजना के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण: निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार ने दिए सख्त निर्देश

निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार ने कहा कि अमृत योजना के अंतर्गत सभी अधोसंरचनात्मक कार्यों को…

14 minutes ago

अमानक दही बेचने पर श्री नैवेद्यम रेस्टोरेंट रेस्टोरेंट संचालक पर 30 हजार का जुर्माना

यदि 30 दिनों में जुर्माना जमा नहीं किया गया तो खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा…

23 hours ago

शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में सख्ती!नामांकन मैपिंग में लापरवाही पर जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर भड़की

बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश अग्रहरि, जिला परियोजना समन्वयक प्रेम नारायण तिवारी, विकासखंड शिक्षा…

23 hours ago

This website uses cookies.