बेटा ही निकला पिता-सौतेली मां का कातिल: बड़वारा पुलिस ने 24 घंटे में सुलझाया सनसनीखेज दोहरा हत्याकांड

यह घटना परिवारिक कलह के खतरों को उजागर करती है, जहां छोटे-छोटे विवाद जानलेवा रूप ले सकते हैं

बड़वारा (कटनी), 16 नवंबर 2025: माता-पिता से बार-बार ताने और झगड़ों से तंग आकर एक किशोर बेटे ने ही अपने पिता और सौतेली मां की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी।

ग्राम निगहरा के एक खेत की झोपड़ी में रातभर छिपी इस क्रूर घटना का पर्दाफाश बड़वारा पुलिस ने मात्र 24 घंटों में कर दिया। आरोपी 19 वर्षीय अभिषेक कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो खुद मृतक लल्लूराम कुशवाहा का बेटा है।

घटना की शुरुआत 15 नवंबर की सुबह हुई, जब अभिषेक ने खेत मालिक रघुनाथ श्रीवास को फोन किया। रघुनाथ के अनुसार, अभिषेक ने बताया कि उसकी बहन रश्मी ने सूचना दी है कि रात में किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसके माता-पिता को मार डाला।

रघुनाथ तुरंत ग्राम निगहरा पहुंचे, जहां झोपड़ी के अंदर लल्लूराम (उम्र अज्ञात) और उनकी पत्नी प्रभा बाई कुशवाहा की लाशें बिस्तर पर पड़ी मिलीं। दोनों के चेहरे और गले से खून बह रहा था।

रघुनाथ ने तुरंत बड़वारा थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 103(1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कराया।पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के सख्त निर्देश पर थाना प्रभारी उनि. कृष्ण कुमार पटेल ने विशेष जांच टीम गठित की।

मजबूत मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों के सहारे पुलिस ने अभिषेक को ही हत्यारोपित के रूप में चिह्नित किया। पूछताछ में अभिषेक ने कबूल किया कि एक साल पहले हुए एक्सीडेंट के इलाज के लिए पिता ने पैसे खर्च किए थे, लेकिन इसके बदले रोजाना ताने मारते थे।

लल्लूराम की दूसरी शादी प्रभा बाई से होने के बाद घर में लगातार झगड़े होते रहते थे। “रोज-रोज की लड़ाइयों से तंग आकर मैंने फैसला ले लिया,” अभिषेक ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया। उसने रात में सोते समय दोनों की गर्दन पर लोहे की कुल्हाड़ी से वार किए, जिससे मौके पर ही दोनों की मौत हो गई।

घटना स्थल पर अभिषेक के मेमोरेंडम कथन दर्ज किए गए, जहां हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी भी बरामद हो गई। आरोपी को रिमांड पर लेकर आगे पूछताछ की जा रही है।

इस मामले में अभिषेक की बहन रश्मी और परिवार के अन्य सदस्यों की भी भूमिका की जांच चल रही है।

पुलिस की तत्परता की सराहना:

डीएसपी हेडक्वार्टर ऊषा राय ने बताया, “यह एक संवेदनशील मामला था, लेकिन हमारी टीम की मेहनत से इतनी जल्दी सफलता मिली।

मुखबिरों और फोरेंसिक साक्ष्यों ने अहम भूमिका निभाई।” थाना प्रभारी उनि. केके पटेल ने कहा, “परिवारिक कलह ने इस हत्याकांड को जन्म दिया। हम ऐसे मामलों में जागरूकता अभियान चलाएंगे।

“इस सफलता में डीएसपी ऊषा राय, उनि. प्रदीप जाटव, सउनि महेश प्रताप सिंह, सउनि रामनाथ साकेत, प्रधान आरक्षक लालजी यादव, राजकुमार सिंह, बीरेन्द्र कुमार, आरक्षक गौरीशंकर राजपूत, शिवप्रकाश तिवारी, बृजलाल प्रजापति, रवि कुमार कोरी और ग्राम सुरक्षा समिति सदस्य कमलेश निषाद की विशेष भूमिका रही।

यह घटना परिवारिक कलह के खतरों को उजागर करती है, जहां छोटे-छोटे विवाद जानलेवा रूप ले सकते हैं।

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