पहाड़ी अवैध खनन के कारण दिन-प्रतिदिन कटती जा रही है, और उस कटे हुए पत्थर-मिट्टी से आसपास इमारतें बन रही, जिम्मेदार बांधे हैं आंखों में पट्टी कटनी।
कटनी की लाल पहाड़ी तेजी से गायब हो रही है: अवैध खनन माफियाओं की मनमानी, प्रशासन की चुप्पी पर सवालकटनी (मध्य प्रदेश) — शहर के बीचों-बीच स्थित प्राकृतिक धरोहर लाल पहाड़ी अब विनाश के कगार पर है।
बॉक्साइट और लेटेराइट खनिजों से समृद्ध यह पहाड़ी अवैध खनन के कारण दिन-प्रतिदिन कटती जा रही है, और उस कटे हुए पत्थर-मिट्टी से आसपास इमारतें बन रही हैं।
स्थानीय लोगों का सवाल है — पहाड़ी काटकर इमारतें बनाने की इजाजत कौन दे रहा है?माधवनगर थाना क्षेत्र में फैली करीब 300 एकड़ की लाल पहाड़ी कभी क्षेत्र की शोभा और पर्यावरणीय संतुलन का हिस्सा थी।
लेकिन अब एलआईसी कार्यालय के आसपास भारी मशीनों (जैसे जेसीबी) से लगातार खुदाई कर जमीन काट ली गई। सूत्रों के मुताबिक, दिन में खनन होता है और रात में कटे माल को ट्रांसपोर्ट किया जाता है।
पर्यावरणीय खतरा बढ़ रहा हैविशेषज्ञों का कहना है कि बिना किसी माइनिंग प्लान या पर्यावरणीय NOC (अनापत्ति प्रमाण-पत्र) के यह अवैध उत्खनन क्षेत्र की हरियाली, भूजल स्तर और मिट्टी के संतुलन को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।
अनियंत्रित खनन से भू-क्षरण, जल संकट और प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है — “शहर के अंदर इतना बड़ा खनन चल रहा है, फिर भी कोई रोक नहीं लगा रहा।
”खनिज विभाग की भूमिका पर उठे सवालखनिज विभाग की निष्क्रियता सबसे बड़ा सवाल बन गई है। नियमों के अनुसार खनन के लिए वैध परमिट, पर्यावरण मंजूरी और रॉयल्टी का भुगतान जरूरी है, लेकिन यहां इनकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
शासन को करोड़ों रुपये की रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है, जबकि माफिया बेखौफ कमाई कर रहे हैं।पहाड़ी से निकले पत्थर और मिट्टी का इस्तेमाल आसपास की इमारतों और प्लॉटिंग में हो रहा है। कई जगहों पर बाउंड्री वॉल और निर्माण कार्य भी नजर आ रहे हैं।
हाल ही में लाल पहाड़ी पर सरकारी जमीन के कथित घोटाले और फर्जी NOC के आरोप भी लगे हैं, जिसकी जांच की मांग की जा रही है।लोगों की मांगतत्काल अवैध खनन पर रोक लगाई जाए।
खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करे।पर्यावरणीय क्षति का आकलन कर पहाड़ी को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
प्रशासन से अपीलकटनी कलेक्टर और खनिज विभाग के अधिकारी अगर जल्दी सक्रिय नहीं हुए, तो यह प्राकृतिक धरोहर पूरी तरह खत्म हो सकती है।
शहर के बीचों-बीच चल रही इस मनमानी पर अब सख्त एक्शन की जरूरत है।क्या लाल पहाड़ी बच पाएगी? या माफियाओं के हौसले और प्रशासन की चुप्पी इसे हमेशा के लिए निगल जाएगी? स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की नजर अब अधिकारियों पर टिकी हुई है।
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