भोपाल। मध्य प्रदेश में 3 फरवरी से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के विनियम 2023 को छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि पढ़ाई और शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े मामलों में अभी पुरानी गाइडलाइन ही लागू रहेगी, लेकिन छात्रों की शिकायतों का निपटारा यूजीसी 2023 के नियमों के अनुसार किया जाएगा।
उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग और उनसे जुड़े कॉलेजों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है। विभाग का कहना है कि कई संस्थानों में लोकपाल नियुक्त होने के बावजूद शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे छात्रों को लंबे समय तक न्याय नहीं मिल पाता।
अब छात्र प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी, तय फीस से ज्यादा वसूली, फीस रिफंड में देरी, छात्रवृत्ति न मिलना, परीक्षा या परिणाम में देरी, आरक्षण नियमों का उल्लंघन, भेदभाव, शिक्षा की गुणवत्ता में कमी और मानसिक उत्पीड़न जैसे मामलों में शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
लोकपाल द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करना सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य होगा।उच्च शिक्षा विभाग ने यह भी साफ किया है कि यदि कोई शिकायत झूठी या बिना आधार की पाई जाती है, तो संबंधित छात्र के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
यह आदेश प्रदेश के सभी सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा।
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