मध्य प्रदेश में 4 नए मेडिकल कॉलेज: PPP मॉडल पर तीखा विरोध, ‘जिला अस्पतालों का निजीकरण’ का आरोप

लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी ने 27 दिसंबर के भूमिपूजन कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की



भोपाल।पन्ना, धार, बैतूल और कटनी जिले में प्रस्तावित चार नए मेडिकल कॉलेजों के PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल के आधार पर 27 दिसंबर 2025 को होने वाले भूमिपूजन कार्यक्रम के खिलाफ मध्य प्रदेश में तेज़ विरोध शुरू हो गया है।
लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) की प्रदेश अध्यक्ष विन्देश्वरी पटेल ने जारी एक बयान में इसे “जन स्वास्थ्य का सुनियोजित व्यावसायीकरण” और “जिला अस्पतालों का खुला निजीकरण” करार दिया। पार्टी ने इन चारों परियोजनाओं को तत्काल रद्द करने, भूमिपूजन स्थगित करने और शासकीय मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग की है।
मुख्य आपत्तियाँ (लोसपा के अनुसार):
दोनों चयनित संस्थाएँ (स्वामी विवेकानंद शिक्षा धाम फाउंडेशन और विवेकानंद बोधि नॉलेज फाउंडेशन) का पंजीकरण मात्र जुलाई 2025 में हुआ, जबकि टेंडर शर्तों में न्यूनतम 5 वर्ष का अनुभव अनिवार्य था
दोनों संस्थाएँ एक ही परिवार/समूह से जुड़ी हुई हैं, जो पहले से RKDF ग्रुप के माध्यम से प्रदेश में कई मेडिकल कॉलेज चला रहा है → एकाधिकार और हितों के टकराव का गंभीर खतरा
संबंधित समूह के मेडिकल कॉलेजों पर पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा जुर्माना, प्रवेश रोक और अन्य कार्रवाई हो चुकी है
जिला अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने से गरीब, आदिवासी और ग्रामीण मरीजों के लिए मुफ्त/सस्ती सेवाएँ लगभग खत्म हो जाएँगी
केवल 25% बिस्तर गरीब मरीजों के लिए आरक्षित रखने का प्रस्ताव सामाजिक न्याय के खिलाफ
पूरे प्रोजेक्ट में स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों से कोई सार्थक परामर्श नहीं किया गया
पिछड़े जिले कटनी को जिला अस्पताल ही नहीं, बल्कि उसका पूरा मेडिकल कॉलेज प्रोजेक्ट निजी हाथों में सौंपना “समझ से परे”
पार्टी की प्रमुख माँगें:
27 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित सभी भूमिपूजन कार्यक्रम तत्काल रद्द किए जाएँ
सभी PPP समझौते/एमओयू निलंबित किए जाएँ
टेंडर प्रक्रिया के समस्त दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएँ
पूरे चयन एवं निर्णय प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए
चारों जिलों में पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएँ
विन्देश्वरी पटेल ने कहा:
“सरकार स्वास्थ्य को संवैधानिक अधिकार मानने के बजाय बाजार का माल बना रही है। पिछड़े और आदिवासी बहुल जिलों के जिला अस्पताल गरीबों की जीवनरेखा हैं, इन्हें निजी कंपनियों के हवाले करना जनता के साथ विश्वासघात है।”
पृष्ठभूमि संदर्भ
मध्य प्रदेश में इससे पहले भी PPP/CSR मॉडल में कई प्रयोग असफल रहे हैं, जिनमें सबसे चर्चित अलीराजपुर जिले का 2016 का दीपक फाउंडेशन वाला मामला है, जो जन विरोध और अदालती हस्तक्षेप के बावजूद अंततः विफल हो गया था।
वर्तमान विवाद से लगता है कि मेडिकल शिक्षा और जिला अस्पतालों के PPP मॉडल पर मध्य प्रदेश में अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष शुरू होने जा रहा है।

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