कटनी में सीएम हेल्पलाइन पर बड़ा सवाल: एक साल बाद भी किसान सम्मान निधि शिकायत लंबित, बिना जानकारी के बंद कर दी गई—किसान की आवाज दबाई?

अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस बार किसान की पुकार सुनता है या फिर इसे भी अनसुना कर देगा?

कटनी, 5 मार्च 2026: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगे हैं। एक किसान की शिकायत क्रमांक 31133787, जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जुड़ी थी, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी निराकृत नहीं हुई। हैरत की बात यह है कि शिकायतकर्ता की जानकारी या सहमति के बिना ही इसे चुपचाप बंद कर दिया गया।

यह शिकायत किसान सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण योजना से संबंधित थी, जिसमें किसानों को सालाना 6,000 रुपये की सहायता मिलती है। किसान ने अपनी मेहनत से उगाई फसल और देश की सेवा के बदले मिलने वाली इस सरकारी मदद के लिए हेल्पलाइन का सहारा लिया था, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बजाय, शिकायत को बिना किसी स्पष्टीकरण के बंद कर दिया गया, जिससे किसान में गहरा असंतोष फैल गया है।

दूसरी शिकायत भी वही हालशिकायतकर्ता ने दोबारा शिकायत दर्ज कराई (क्रमांक 36904779), लेकिन इस बार भी बिना उनकी जानकारी के इसे स्वतः बंद करने की प्रक्रिया चल रही है। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है।किसान की पीड़ा और सवालकिसान सम्मान निधि योजना को सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने और उनकी आर्थिक मजबूती के लिए शुरू किया गया था।

लेकिन जब पात्र किसान को ही अपनी हक की राशि नहीं मिल रही और शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रही है।क्या सीएम हेल्पलाइन केवल दिखावा है?शिकायतों को बिना निराकरण बंद करना कितना उचित है?किसान की आवाज सुनी जाएगी या दबाई जाएगी?यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत मामला है, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों की चीख है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी लापरवाही से किसानों का विश्वास टूटता है और ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ता है।प्रशासन से मांगशिकायत क्रमांक 31133787 और 36904779 का तत्काल, पारदर्शी और वास्तविक निराकरण किया जाए।जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और दोषियों पर कार्रवाई हो।भविष्य में शिकायत बंद करने से पहले आवेदक को सूचित करने की अनिवार्य प्रक्रिया लागू की जाए।

किसान संगठनों और स्थानीय लोगों ने इस मामले पर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल (cmhelpline.mp.gov.in) पर शिकायत की स्थिति जांचने पर भी कोई संतोषजनक अपडेट नहीं मिल रहा।

अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस बार किसान की पुकार सुनता है या फिर इसे भी अनसुना कर देगा?

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