कटनी नगर निगम कार्यालय में ही गंदगी का अंबार: विद्युत विभाग के ऊपर उपयंत्री कक्ष के सामने ,पुराना बाथरूम बना कचराघर, बदबू से कर्मचारियों-नागरिकों को परेशानी

यदि आपके इलाके में भी ऐसी गंदगी की समस्या है, तो नगर निगम हेल्पलाइन या स्वच्छता ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं।

कटनी, 28 फरवरी 2026 — स्वच्छ भारत अभियान और ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ की बातें करने वाला कटनी नगर निगम का अपना मुख्यालय परिसर ही अब गंदगी का गढ़ बनता नजर आ रहा है। नगर निगम कार्यालय के पहले तल पर स्थित पुराने बाथरूम को अवैध कचराघर में तब्दील कर दिया गया है, जहां रोजाना कचरा फेंका जा रहा है।

नतीजा? बदबू और गंदगी से पूरे परिसर में हाहाकार मचा हुआ है, जिससे यहां आने वाले नागरिकों और कर्मचारियों को भारी परेशानी हो रही है।नियमित सफाई का नामोनिशान नहींस्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पुराने बाथरूम में कचरे के ढेर लगे रहते हैं और सफाई कर्मचारी यहां पहुंचते ही नहीं। बदबू इतनी तेज है कि आसपास के कमरों में बैठना मुश्किल हो जाता है। एक नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “जब खुद नगर निगम का दफ्तर गंदा हो, तो हम आम लोगों से स्वच्छता की उम्मीद कैसे करें? यह लापरवाही सीधे प्रशासन की नाकामी दिखाती है।

“स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा, मक्खी-मच्छरों का डरकार्यालय परिसर में फैली गंदगी से मक्खियां, मच्छर और अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे बीमारियों (जैसे डेंगू, मलेरिया, पेट संबंधी संक्रमण) का खतरा मंडरा रहा है। यहां काम करने वाले कर्मचारी और शिकायत लेकर आने वाले नागरिक दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी जगहों पर लंबे समय तक रहना संक्रमण का बड़ा कारण बन सकता है।

प्रशासनिक लापरवाही पर सवालयह स्थिति नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब मुख्यालय में ही नियमित सफाई नहीं हो रही, तो शहर की गलियों-मोहल्लों में सफाई कैसे सुनिश्चित होगी? विशेषज्ञों का मानना है कि यह लापरवाही सफाई कर्मचारियों की कमी, निगरानी की कमी या जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का नतीजा है।

क्या होना चाहिए सुधार?तत्काल सफाई अभियान — नगर निगम को विशेष सफाई दल तैनात कर इस बाथरूम को तुरंत साफ कराना चाहिए और इसे कचराघर बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।डस्टबिन की पर्याप्त व्यवस्था — परिसर में हर फ्लोर पर पर्याप्त संख्या में अलग-अलग डस्टबिन (गीला-सूखा कचरा) लगाए जाएं।

नियमित मॉनिटरिंग — सफाई की दैनिक रिपोर्टिंग और सुपरवाइजर की जिम्मेदारी तय की जाए।जागरूकता अभियान — खुद नगर निगम द्वारा कर्मचारियों और नागरिकों के बीच स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं, ताकि सकारात्मक संदेश जाए।

नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार ने कहा है किप्रशासन जल्द संज्ञान लेगा और अपने मुख्यालय को ही स्वच्छता का मॉडल बनाने की दिशा में कदम उठाएगा। अब देखना होगा कि आगे क्या होगा अन्यथा, यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों पर ही प्रश्नचिह्न लगा देगी।नागरिकों से अपील:

यदि आपके इलाके में भी ऐसी गंदगी की समस्या है, तो नगर निगम हेल्पलाइन या स्वच्छता ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं।

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