कटनी, 25 जून 2026 — जिले में 108 संजीवनी एम्बुलेंस सेवाओं की खराब स्थिति एक बार फिर सामने आई है। बुधवार रात कैंसर से पीड़ित एक गंभीर मरीज को जबलपुर रेफर करते समय एम्बुलेंस में ऑक्सीजन की अनुपलब्धता, अंदर की लाइट खराब और पिछला दरवाजा रस्सी से बंधा होने जैसी गंभीर खामियां सामने आईं। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।घटना क्या हुई?पहाड़ी क्षेत्र के निवासी संतोष कुमार जैन कैंसर पीड़ित हैं। बुधवार रात सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर परिजनों ने 108 एम्बुलेंस बुलाई। मरीज को जबलपुर ले जाने के लिए एम्बुलेंस रवाना हुई, लेकिन रास्ते में वाहन की बदहाल स्थिति देखकर परिजन सकते में आ गए।मरीज के बेटे वरदान जैन ने बताया, “एम्बुलेंस के अंदर पूरी तरह अंधेरा था क्योंकि लाइट बिल्कुल काम नहीं कर रही थी। सबसे बड़ी बात — ऑक्सीजन सिलेंडर भी उपलब्ध नहीं था।
एम्बुलेंस का पिछला दरवाजा रस्सी से बांधकर चलाया जा रहा था। मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी, इसलिए हमने बाईपास पर उतारने की गुजारिश की ताकि निजी वाहन से ले जा सकें, लेकिन कर्मचारियों ने मना कर दिया।”कर्मचारी का बयानएम्बुलेंस में तैनात एएमटी कर्मचारी ने स्वीकार किया कि वायरिंग खराब होने के कारण अंदर की लाइट नहीं जलती। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन पाइपलाइन में लीकेज है, जिसके कारण सिलेंडर होने पर भी ऑक्सीजन सप्लाई नहीं हो पाती। कर्मचारी का कहना है कि इस समस्या की कई बार मौखिक और लिखित शिकायत अधिकारियों को की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ।
परिजनों का विरोधजिला अस्पताल पहुंचने के बाद परिजनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रास्ते में मरीज की हालत और बिगड़ जाती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?सीएमएचओ का बयानमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा, “यह मामला बेहद गंभीर है। हमने तुरंत जांच शुरू कर दी है। 108 एम्बुलेंस संचालित करने वाली एजेंसी को सभी तकनीकी खामियां तत्काल ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। मरीजों की जान से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”नोट:यह घटना जिले में 108 एम्बुलेंस सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जल्द ही इसकी जांच रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
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सख्त लेकिन संवेदनशील’ पुलिसिंग का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरी है।
अब इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई केंद्र सरकार के जवाब के बाद होगी।
प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार को मुख्य कारण माना जा रहा है।
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पुलिस पूरे मामले की आगे की जांच कर रही है।
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