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जिला पंचायत में सख्ती: चार ग्राम पंचायतों में 9.83 लाख की वित्तीय अनियमितता, CEO ने की वसूली के निर्देश

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अधिकारियों का कहना है कि नियमित ऑडिट और डिजिटल निगरानी को बढ़ावा देकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि नियमित ऑडिट और डिजिटल निगरानी को बढ़ावा देकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

कटनी (ब्यूरो): पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। विजयराघवगढ़, बहोरीबंद और बड़वारा जनपद पंचायतों के अंतर्गत चार ग्राम पंचायतों में करोड़ों की विकास योजनाओं के बीच लाखों रुपये की गड़बड़ियां सामने आई हैं।जिला पंचायत सीईओ एवं विहित प्राधिकारी सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी आरोपियों को सुनवाई के लिए तलब किया। जांच और सुनवाई के बाद उन्होंने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत कुल 9 लाख 83 हजार 100 रुपये की वसूली योग्य राशि पर विधिसम्मत कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए हैं।

प्रमुख अनियमितताएं:ग्राम पंचायत खलवारा: सीसी रोड और नाली निर्माण कार्य में तत्कालीन सरपंच व सचिव द्वारा 4 लाख 17 हजार 600 रुपये की आर्थिक गड़बड़ी पाई गई।ग्राम पंचायत नीमखेड़ा: सोलर लाइट खरीदी में भंडार क्रय नियमों को दरकिनार कर 2 लाख 80 हजार रुपये की अनियमितता।ग्राम पंचायत सलैया प्यासी: सोलर लाइट खरीदी में ही 1 लाख 65 हजार 500 रुपये की वित्तीय अनियमितता।ग्राम पंचायत बनगवा: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 1 लाख 20 हजार रुपये की वसूली योग्य राशि मामले में सेक्टर सुपरवाइजर, सरपंच, सचिव, बीसी और हितग्राही को नोटिस।

सुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत नीमखेड़ा के तत्कालीन सचिव की अनुपस्थिति ने भी सवाल खड़े किए। सीईओ सुश्री कौर ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण किया और वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए।यह घटना ग्रामीण विकास योजनाओं में पंचायत स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि नियमित ऑडिट और डिजिटल निगरानी को बढ़ावा देकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

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