कटनी (23 जनवरी) – विकासखंड ढीमरखेड़ा के शासकीय उचित मूल्य दुकान बरेली (रामपुर) दुकान कोड- 4206006 के विक्रेता उमेश उर्फ मंदा शर्मा द्वारा 14 लाख 83 हजार रुपये से अधिक के सरकारी राशन के गबन के मामले में कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी ढीमरखेड़ा द्वारा विक्रेता के विरूद्ध ढीमरखेड़ा पुलिस थाना में भारतीय न्याय संहिता और आवश्यक वस्तु अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।
अंगूठा लगवाया पर राशन नहीं दिया
शासकीय उचित मूल्य दुकान बरेली रामपुर के विक्रेता द्वारा खाद्यान्न वितरण में अनियमितता के संबंध में कलेक्ट्रेट में शिकायत प्राप्त हुई। जिस पर कलेक्टर श्री तिवारी ने त्वरित रूप से सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए।
इसके बाद एसडीएम ढीमरखेड़ा ने सहकारिता निरीक्षक नैना मेहरा, तहसीलदार एवं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की टीम गठित कर दुकान के जांच के आदेश दिये। जांच दल ने जब मौके पर जाकर दुकान की जांच की तब विक्रेता उमेश उर्फ मंदा शर्मा मौके उपस्थित नहीं मिले।
मौके पर उपस्थित दुकान से संलग्न हितग्राही सरोज दुबे, अहिल्या बादी, रामचंद्र आदिवासी, सरिता बाई, उपेन्द्र सिंह, मुन्नालाल बादी, नारायण तिवारी और मंजूलाल से पूछताछ की गई, तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।
आरोपी विक्रेता उमेश उर्फ मंदा शर्मा घर-घर जाकर पीओएस मशीन पर ग्रामीणों के अंगूठे तो लगवा लेता था, लेकिन उन्हें राशन नहीं देता था। दुकान भी नियमित रूप से नहीं खोली जाती थी और खाद्यान्न वितरण भी समय पर नहीं किया जाता था।
स्टॉक से गायब मिला सैकड़ों क्विंटल अनाज
संयुक्त जांच दल द्वारा जब दुकान के स्टॉक का मिलान एईपीडीएस पोर्टल एवं पीओएस मशीन के अनुसार की गई, तो भारी अंतर पाया गया। मौके पर गेहूं, चावल और शक्कर पूरी तरह नदारद मिले। वहीं नमक केवल 3 क्विंटल पाया गया।
जबकि गेहूं 93.36 क्विंटल, चावल 179.76 क्विंटल, नमक 13.13 क्विंटल तथा शक्कर 0.60 क्विंटल होना था, लेकिन नहीं पाया गया।इन धाराओं में हुआ मामला दर्ज
विक्रेता द्वारा 7 लाख 18 हजार 700 रूपये के गेहूँ, 7 लाख 52 हजार 466 रूपये के चावल, 10 हजार 130 रूपये के नमक और 1800 रूपये के शक्क्र को मिलाकर कुल 14 लाख 83 हजार 96 रूपये मूल्य के खाद्यान्न की हेराफेरी पाये जाने पर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी वंदना जैन द्वारा ढीमरखेड़ा
पुलिस पुलिस थाना में आरोपी उमेश शर्मा के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4), 316(5) और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 व 7 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई।
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