अवैध कॉलोनी का पर्दाफाश: माधव नगर के सुशील मोटवानी पर FIR, करोड़ों की हेराफेरी और लाखों का सरकारी नुकसान

यह घटना मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनी बूम पर सवाल खड़ी करती है, जहां सस्ते प्लॉटों के नाम पर किसानों की जमीनें लूट ली जाती हैं। प्रभावित पक्षों से अपील है कि वे अपनी शिकायतें निगम हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं

कटनी, 17 नवंबर 2025: नगर निगम की सख्ती से अवैध कॉलोनी निर्माण का एक बड़ा रैकेट पकड़ा गया। माधव नगर निवासी सुशील मोटवानी के खिलाफ कृषि भूमि पर बिना अनुमति प्लाटिंग, सड़क निर्माण और प्लॉट बिक्री के आरोप में माधवनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

निगमायुक्त तपस्या परिहार के सख्त निर्देश पर यह कार्रवाई की गई, जिसमें मोटवानी पर करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाने का आरोप है।

इस घोटाले से निगम और शासन कोष को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।प्रकरण की गहराई में उतरें तो सुशील मोटवानी (पिता: सुंदर दास मोटवानी, निवासी: मकान नंबर 484, संत कंवराम राम वार्ड, माधव नगर) ने रविंद्र नाथ टैगोर वार्ड के अंतर्गत ग्राम पड़रवारा की कृषि भूमि (खसरा नंबर: 571, 572/2, 584, 586/2, 586/3, 586/4, 639, 640, 640/1, 643/1/1, 644, 644/1, 645, 645/1, 646, 646/1, 649, 649/1, 649/1/1, 649/1/1/1 एवं 649/2; कुल रकबा: 6.2000 हेक्टेयर) पर सक्षम अधिकारियों की अनुमति के बिना अवैध प्लाटिंग कराई।

यहां RCC सड़क, पानी की टंकी और बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया गया, तथा लगभग 20 अलग-अलग व्यक्तियों को प्लॉट बेचकर करोड़ों का काला धन कमाया।

शिकायतकर्ता उपयंत्री जे.पी. सिंह बघेल ने बताया कि मोटवानी ने न तो कॉलोनाइजर लाइसेंस लिया, न ही नगर पालिका निगम या नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से लेआउट नक्शा या निर्माण अनुमति प्राप्त की।

राजस्व अभिलेखों में यह भूमि कृषि प्रयोजन की दर्ज है, फिर भी गैर-कृषि उपयोग के लिए इसका दुरुपयोग किया गया। शिकायत के साथ विक्रय पत्रों, खरीदारों की सूची और खसरा पंचसाला की प्रमाणित प्रतियां संलग्न हैं, जो इस घोटाले की पोल खोलती हैं।

नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा 192(सी) के तहत दर्ज इस FIR में धारा 292(ग) के उल्लंघन का भी जिक्र है।

निगमायुक्त तपस्या परिहार ने कहा, “अवैध निर्माण और भूमि हेराफेरी शहरी विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। हम ऐसी कार्रवाइयों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस अपनाएंगे, ताकि आम नागरिकों के हित सुरक्षित रहें।

” इस मामले से न केवल सरकारी राजस्व को चपत लगी, बल्कि क्रेताओं ने भी जानबूझकर अवैध प्लॉट खरीदे। कई ने बिना अनुमति भवन बनवाए और विद्युत कनेक्शन तक लगवा लिए, जो आगे की जांच का विषय बनेगा।

स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है।

एक प्रभावित निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ऐसी अवैध कॉलोनियों से हमारी संपत्ति का मूल्य गिर रहा था। अब उम्मीद है कि सख्ती से शहर का नियोजित विकास होगा।

” प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अवैध निर्माणकर्ताओं और खरीदारों पर आगे जुर्माना और विध्वंस की कार्रवाई हो सकती है। जिला कलेक्टर कार्यालय ने मामले की निगरानी के लिए एक टीम गठित की है।

यह घटना मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनी बूम पर सवाल खड़ी करती है, जहां सस्ते प्लॉटों के नाम पर किसानों की जमीनें लूट ली जाती हैं। प्रभावित पक्षों से अपील है कि वे अपनी शिकायतें निगम हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं।

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