कटनी: खेत की कटीली फेंसिंग में फंसा तेंदुआ, ग्रामीणों में दहशत; बांधवगढ़ से विशेष रेस्क्यू टीम पहुंची

वन विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित सूचना और सहयोग से जान-माल की हानि रोकी जा सकती है। विभाग ने ग्रामीणों से शांत रहने और सहयोग करने की अपील की है

कटनी (मध्य प्रदेश)। जिले के विजयराघवगढ़ क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष का एक और मामला सामने आया है। गुरुवार सुबह ग्राम दरौडी के एक खेत में लोहे की कटीली तारों (बार्ब्ड वायर फेंसिंग) में एक तेंदुआ बुरी तरह फंस गया।

घटना की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई, जिससे स्थिति और जटिल हो गई।शिकार की तलाश में आया तेंदुआ फंस गयाजानकारी के अनुसार, तेंदुआ संभवतः रात में शिकार की तलाश या इलाके में भटकते हुए खेत की ओर आया। यहां लगी सुरक्षा फेंसिंग में उलझने के कारण वह खुद को छुड़ाने की भरपूर कोशिश करता रहा, जिससे उसके शरीर पर गहरे घाव आ गए और वह लहूलुहान हो गया।

दर्द से तड़पते और आक्रामक हो चुके तेंदुए को देखकर ग्रामीण भयभीत हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत वन विभाग को सूचित किया।वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और घेराबंदीसूचना मिलते ही विजयराघवगढ़ और बड़वारा रेंज के वन अमले ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। टीम ने तेंदुए के आसपास 500 मीटर तक का क्षेत्र घेर लिया और ग्रामीणों के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया।

तेंदुए की आक्रामकता और घायल स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर रेस्क्यू मुश्किल होने की आशंका जताई गई, जिसके चलते बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की विशेष ट्रैंक्विलाइजेशन (बेहोशी की दवा से बेहोश करने वाली) रेस्क्यू टीम को तुरंत बुलाया गया।

टीम रवाना हो चुकी है और जल्द ही मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन शुरू करेगी।ग्रामीणों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारीवन विभाग ने ग्रामीणों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं:

घटनास्थल के 500 मीटर दायरे में किसी भी तरह की भीड़ या शोर न करें, इससे तेंदुआ और उत्तेजित हो सकता है।अकेले खेतों, खुले इलाकों या जंगल की ओर न जाएं।बच्चों और पालतू मवेशियों को घर के अंदर या सुरक्षित स्थान पर रखें।किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।रेस्क्यू के बाद क्या होगा?

बांधवगढ़ की टीम पहुंचने के बाद तेंदुए को ट्रैंक्विलाइजर डार्ट से बेहोश कर सुरक्षित रूप से फेंसिंग से मुक्त किया जाएगा। उसके बाद पशु चिकित्सक द्वारा उसका मेडिकल चेकअप और प्राथमिक उपचार किया जाएगा।

स्वास्थ्य सामान्य होने पर तेंदुए को बांधवगढ़ या निकटवर्ती सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।यह घटना कटनी जिले में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की ओर इशारा करती है, जहां जंगलों के किनारे बसे गांवों में तेंदुओं की आवाजाही आम हो गई है।

वन विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित सूचना और सहयोग से जान-माल की हानि रोकी जा सकती है। विभाग ने ग्रामीणों से शांत रहने और सहयोग करने की अपील की है।

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