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खिरहनी तालाब विवाद में एसडीएम कोर्ट का बड़ा फैसला: 3.41 एकड़ भूमि फिर से शासकीय घोषित, तालाब का दर्जा बहाल

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भूमि को पुनः प्रांतीय सरकार के नाम दर्ज करने और तालाब का दर्जा बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। इस आदेश का क्रियान्वयन तहसीलदार, कटनी नगर को सौंपा गया है।

भूमि को पुनः प्रांतीय सरकार के नाम दर्ज करने और तालाब का दर्जा बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। इस आदेश का क्रियान्वयन तहसीलदार, कटनी नगर को सौंपा गया है।

कटनी (10 जून 2026) – कटनी के ग्राम खिरहनी में सार्वजनिक तालाब के स्वामित्व को लेकर चले लंबे विवाद पर एसडीएम न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने खसरा नंबर 1091 एवं 1092 (रकबा 3.41 एकड़) वाली भूमि को पुनः शासकीय दर्ज कराने का आदेश दिया है। साथ ही कैफियत कॉलम में “तालाब है, पानी का निस्तार सुरक्षित” दर्ज करने का निर्देश भी जारी किया गया है।कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा मामले को गंभीरता से लेने के बाद एसडीएम न्यायालय ने यह आदेश पारित किया।

पूरा मामलाग्राम खिरहनी के राजकुमार, वृन्दावन पटेल सहित कई ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष आवेदन देकर आरोप लगाया था कि तालाब की यह भूमि ग्रामवासियों के सार्वजनिक उपयोग के लिए है, लेकिन कुछ लोगों ने अवैध रूप से इसे अपने नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करा लिया।तहसीलदार, कटनी नगर की जांच रिपोर्ट और जिला अभिलेखागार के दस्तावेजों से पता चला कि:वर्ष 1962-63 में खसरे के कॉलम-3 में ‘सरकार’ दर्ज था।वर्ष 1963-64 से 1965-66 तक भूमि ‘प्रांतीय सरकार’ के नाम पर थी।लेकिन 1966-67 से बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के इसे निजी व्यक्तियों (नरबदा प्रसाद आदि) के नाम भूमिस्वामी के रूप में दर्ज कर दिया गया।

अनावेदकों का तर्क और कोर्ट का फैसला अनावेदकों के वकील ने दावा किया कि यह भूमि 1907-08 से ही उनके पूर्वजों के निजी स्वामित्व में चली आ रही है। उन्होंने पुराने निर्णयों और स्थगन आदेशों का हवाला भी दिया।हालांकि, सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि वर्तमान भूमिस्वामियों ने कोई प्रमाणित दस्तावेज नहीं पेश किया, जिसमें यह साबित हो सके कि शासकीय भूमि को उनके नाम सक्षम अधिकारी के आदेश से दर्ज किया गया था।एसडीएम ने म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के प्रावधानों के तहत राजस्व अभिलेखों को वर्ष 1963-64 की स्थिति के अनुसार सुधारने का आदेश दिया।

भूमि को पुनः प्रांतीय सरकार के नाम दर्ज करने और तालाब का दर्जा बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। इस आदेश का क्रियान्वयन तहसीलदार, कटनी नगर को सौंपा गया है।

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