कटनी।मध्य प्रदेश के कटनी जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही को एक बार फिर उजागर कर दिया है। विकासखंड विजयराघवगढ़ के अंतर्गत माध्यमिक शाला बम्हनगवां में स्कूल के जर्जर शौचालय (मूत्रालय/बाथरूम) की दीवार अचानक ढह गई, जिससे कक्षा 5वीं का 10-11 वर्षीय छात्र राजकुमार बर्मन मलबे में दब गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।यह हादसा हाल ही में (फरवरी 2026 के आसपास) हुआ, जिसमें बच्चा शौचालय का उपयोग करने या उसके पास गया था, तभी पुरानी और कमजोर दीवार भरभरा कर गिर पड़ी।
राजकुमार के पिता पहले ही नहीं रहे हैं, और वह अपनी मां शिवकुमारी बर्मन का इकलौता सहारा था, जो फुल्की का ठेला लगाकर परिवार चलाती हैं। घटना के बाद ग्रामीणों और परिवार में गहरा शोक छा गया, साथ ही स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।प्रशासन की सख्त कार्रवाईप्रारंभिक जांच में जनपद शिक्षा केंद्र विजयराघवगढ़ के संविदा उपयंत्री मनोज स्वर्णकार की लापरवाही सामने आई।
कलेक्टर आशीष तिवारी ने उन्हें दोषी मानते हुए तुरंत शासकीय कार्यों से विरत (निलंबित) कर दिया है। जांच में पाया गया कि:उपयंत्री का दायित्व था कि वे अधीनस्थ स्कूलों की निरंतर मॉनिटरिंग करें, जर्जर संरचनाओं की पहचान कर उन्हें प्रतिबंधित या ध्वस्त करवाएं।राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल और जिला शिक्षा केंद्र कटनी से बार-बार सुरक्षा निर्देश मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।स्कूल को मिली 25% आकस्मिक निधि का उपयोग आवश्यक मरम्मत में नहीं किया गया।
जर्जर शौचालय की कोई जानकारी उच्च अधिकारियों को नहीं दी गई, न ही मरम्मत कराई गई और न ही बच्चों की सुरक्षा के उपाय किए गए।कारण बताओ नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर उन्हें दोषी ठहराया गया।कलेक्टर ने विस्तृत जांच के लिए बीआरसीसी विजयराघवगढ़ श्री चेतराम सिंह मरकाम और प्रभारी सहायक यंत्री जिला शिक्षा केंद्र कटनी श्री रोहित हल्दकार को संयुक्त जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
उन्हें 1 महीने के अंदर पूरी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच पूरी होने तक उपयंत्री को 50% पारिश्रमिक पर जीवन निर्वाह की अनुमति होगी।ग्रामीणों में आक्रोश और अन्य मुद्देघटना के बाद स्थानीय लोग और छात्र संगठन (जैसे एनएसयूआई) ने प्रदर्शन किए।
मृतक की मां ने आरोप लगाया कि जरूरत के समय कोई मदद नहीं मिली, जबकि अन्य मामलों में नेता-अधिकारी पहुंचते हैं। कुछ रिपोर्टों में एम्बुलेंस की देरी, खदान ब्लास्टिंग से इमारत कमजोर होने जैसे अतिरिक्त पहलू भी सामने आए हैं, लेकिन मुख्य जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की बताई जा रही है।यह घटना सरकारी स्कूलों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण है, जहां जर्जर भवन बच्चों की जान ले रहे हैं। उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और
पूरे जिले में स्कूल इमारतों का व्यापक निरीक्षण करवाया जाएगा ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो
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