कटनी जिले का ऐतिहासिक विजयराघवगढ़ किला, जो कभी राजा प्रयागदास की शौर्यगाथा और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में राजा सरयूप्रसाद के योगदान का गवाह रहा, आज बदहाल स्थिति में खड़ा है। स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन अवसर पर भी किले की जर्जरता उजागर हो गई, जब इसके प्रवेश द्वार की छत का एक हिस्सा अचानक ढह गया। छत में बने छेद ने स्पष्ट कर दिया कि यह धरोहर अब कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।किले की बदहाली की तस्वीरहाल ही में दीवार का कोना क्षतिग्रस्त हो गया। किले की दीवारों की दरारों में पेड़-पौधे उग आए हैं, जो धीरे-धीरे इसकी नींव को कमजोर कर रहे हैं। रंगमहल की नक्काशी और कलात्मक दीवारें टूट-फूट का शिकार हो चुकी हैं। आंतरिक हिस्सों में सफाई का अभाव, सीलन और काई ने पत्थरों को और कमजोर कर दिया है।कभी पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करने वाला यह किला आज अव्यवस्था और उपेक्षा का शिकार है। पर्यटकों को न तो उचित मार्गदर्शन मिलता है और न ही पहले जैसी सुविधाएं। झाड़-झंखाड़ और बेतरतीब वनस्पति ने किले को जंगल जैसा बना दिया है, जिसके कारण लोग निराश होकर लौट रहे हैं।गौरवशाली इतिहास पर उपेक्षा की मारविजयराघवगढ़ किले का निर्माण 1826 में राजा प्रयागदास ने अपने आराध्य भगवान राघवजी की स्मृति में कराया था। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में यह किला क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र रहा। 1957 में विजयराघवगढ़ राजपरिवार ने इसे पुरातत्व विभाग को सौंपा था, ताकि इस धरोहर को संरक्षित किया जा सके। शुरुआती वर्षों में विभाग ने संरक्षण का कार्य किया, लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति बदल गई।रखरखाव का अभाव और प्रशासनिक लापरवाहीजानकारी के अनुसार, राज्य शासन ने किले को पर्यटन गतिविधियों के लिए प्राइवेट एजेंसियों को लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू की, जिसके बाद पुरातत्व विभाग ने इससे हाथ खींच लिया। नतीजतन, रखरखाव का कार्य पूरी तरह ठप हो गया। आज यह किला अव्यवस्था का शिकार बन चुका है। किले की बदहाल स्थिति न केवल इसके ऐतिहासिक महत्व को नष्ट कर रही है, बल्कि यह पर्यटकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गया है।संरक्षण की जरूरतस्थानीय लोग और इतिहास प्रेमी मांग कर रहे हैं कि प्रशासन तत्काल कदम उठाए और किले के संरक्षण के लिए ठोस योजना बनाए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते रखरखाव और मरम्मत का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह खंडहर में बदल जाएगी। कटनी जिले की इस धरोहर को बचाने के लिए पुरातत्व विभाग और राज्य सरकार को मिलकर त्वरित कार्रवाई करनी होगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस गौरवशाली इतिहास से रूबरू हो सकें।
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