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विजयराघवगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर पर मंडराता खतरा: किले के पास अवैध प्लाटिंग की तैयारी

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नगरवासियों की अपील: समय रहते प्रशासन को हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा विजयराघवगढ़ की पहचान इतिहास की किताबों तक ही सिमट कर रह जाएगी।

नगरवासियों की अपील: समय रहते प्रशासन को हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा विजयराघवगढ़ की पहचान इतिहास की किताबों तक ही सिमट कर रह जाएगी।


विजयराघवगढ़ (मध्य प्रदेश): सदियों पुरानी ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक आस्था का प्रतीक विजयराघवगढ़ अब अवैध भूमि प्लाटिंग के खतरे में है। शारदा मंदिर के समीप किले से जुड़ी भूमि पर जमीन की नाप-जोख, सीमांकन और प्लाट विक्रय की तैयारियाँ तेज हो गई हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों में गहरी नाराजगी और चिंता व्याप्त है।
अवैध प्लाटिंग का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक किले और धार्मिक स्थलों के आसपास की भूमि को टुकड़ों में बाँटकर बेचने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह पहली बार नहीं है। पहले भी सैकड़ों सागौन के वृक्ष काटकर भूमि कारोबार किया जा चुका है, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस अवैध गतिविधि पर अंकुश नहीं लगाया गया तो विजयराघवगढ़ की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाएगी।
कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन?
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता और कॉलोनाइजर एक्ट के तहत धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक स्थलों तथा कृषि भूमि पर बिना उचित अनुमति प्लाटिंग करना पूरी तरह अवैध है। इसके बावजूद यदि इस क्षेत्र में प्लाटिंग की गतिविधियाँ चल रही हैं, तो सवाल प्रशासनिक नाकामी और भूमाफियाओं के संरक्षण पर उठ खड़ा होता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि “पैसों के प्रभाव में नियमों को धता बताकर यह सब हो रहा है और प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है।”
जनता की चिंता
विजयराघवगढ़ के कई नागरिकों ने कहा, “यह सिर्फ जमीन का सौदा नहीं है, बल्कि हमारी विरासत और अस्मिता को बेचने की साजिश है।” उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत इस अवैध प्लाटिंग को रोका जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की भूमिका
अभी तक इस मामले में स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह न सिर्फ ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की विफलता होगी, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाएगा।
नगरवासियों की अपील: समय रहते प्रशासन को हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा विजयराघवगढ़ की पहचान इतिहास की किताबों तक ही सिमट कर रह जाएगी।

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