Katni City News:माफियाओं की साजिश बेनकाब: निषाद परिवार की पुश्तैनी ज़मीन हड़पने का षड्यंत्र उजागर

धोखे और जालसाजी का ताना-बाना (मेसर्स शिवा बिल्डकॉन के पार्टनर, माधवनगर निवासी विकास गुप्ता और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी हीरानंद टहलरमानी)

कटनी, 31 अगस्त 2025: जिले में भू माफियाओं के काले कारनामों का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरस्वती स्कूल के पास, नई बस्ती, जगमोहनदास वार्ड निवासी स्व. रामलाल निषाद की दो बेटियों, सावित्री निषाद (52 वर्ष) और ममता निषाद (49 वर्ष), ने भू माफियाओं पर उनकी पुश्तैनी ज़मीन हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है। दोनों बहनों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराकर इस साजिश को उजागर किया है।

धोखे और छल का जाल

शिकायत के अनुसार, मेसर्स शिवा बिल्डकॉन के पार्टनर, माधवनगर निवासी विकास गुप्ता और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी हीरानंद टहलरमानी ने निषाद बहनों की अशिक्षा और कानूनी जानकारी की कमी का फायदा उठाकर उनकी पैतृक ज़मीन पर कब्जा कर लिया। यह ज़मीन मुडवारा तहसील के अंतर्गत जगमोहनदास वार्ड, नई बस्ती में प.ह.न. 43 के खसरा नं. 461/2, 461/1, और 453/1 में दर्ज है, जिसका कुल रकबा 3.431 हेक्टेयर है।

कैसे रची गई साजिश?

निषाद बहनों ने बताया कि उनके पिता रामलाल निषाद का निधन 2007 में और माता का निधन 2014 में हो चुका था। परिवार के नामांतरण तो हुए, लेकिन ज़मीन का बँटवारा विधिवत नहीं हुआ। इसी का फायदा उठाते हुए, 20 सितंबर 2016 को आरोपियों ने बहनों को बरगलाया कि उनकी कंपनी ज़मीन को प्लॉटिंग कर विकसित करेगी। धोखे से करार पर हस्ताक्षर करवाए गए, लेकिन वादा की गई राशि का भुगतान आज तक नहीं किया गया।

करार में हेराफेरी और फर्जीवाड़ा

करार की प्रति प्राप्त करने पर पता चला कि 0.64 हेक्टेयर (लगभग 1 एकड़ 60 डिसमिल) ज़मीन को षड्यंत्रपूर्वक करार में शामिल कर लिया गया। करार में यह भी लिखवाया गया कि 90% कॉलोनी, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, और डुप्लेक्स बनाने का अधिकार ममता निषाद के नाम होगा, ताकि वे बैनामा कर सकें। इसके अलावा, आरोपियों ने फर्जी हस्ताक्षर करवाकर नोटरी दस्तावेज, शपथपत्र, सहमति पत्र, और आवेदन पत्र तैयार किए, जिन्हें राजस्व और नगर पालिका अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

भुगतान से इंकार, ज़मीन पर कब्जा

निषाद बहनों ने बताया कि बार-बार मांगने के बावजूद करार में उल्लिखित राशि का भुगतान नहीं किया गया। उलटे, उनकी अशिक्षा और कानूनी अज्ञानता का फायदा उठाकर उनकी पुश्तैनी ज़मीन हड़प ली गई।

प्रशासन से न्याय की गुहार

निषाद बहनों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराकर इस साजिश के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने प्रशासन से उनकी ज़मीन वापस दिलाने और दोषियों को सजा देने की अपील की है। इस मामले ने जिले में भू माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस को फिर से उजागर किया है, जिससे प्रशासन पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
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माफियाओं की साजिश बेनकाब: निषाद परिवार की पुश्तैनी ज़मीन हड़पने का षड्यंत्र उजागर

कटनी, 31 अगस्त 2025: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भू माफियाओं के काले कारनामों का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरस्वती स्कूल के समीप, नई बस्ती, जगमोहनदास वार्ड निवासी स्व. रामलाल निषाद की दो बेटियों, सावित्री निषाद (52) और ममता निषाद (49), ने भू माफियाओं पर उनकी पुश्तैनी ज़मीन हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है। दोनों बहनों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कर इस साजिश का पर्दाफाश किया है।

धोखे और जालसाजी का ताना-बाना
शिकायत के अनुसार, मेसर्स शिवा बिल्डकॉन के पार्टनर, माधवनगर निवासी विकास गुप्ता और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी हीरानंद टहलरमानी ने निषाद बहनों की अशिक्षा और कानूनी जानकारी की कमी का फायदा उठाया। यह ज़मीन मुडवारा तहसील के अंतर्गत जगमोहनदास वार्ड, नई बस्ती में प.ह.न. 43 के खसरा नं. 461/2, 461/1, और 453/1 में दर्ज है, जिसका कुल रकबा 3.431 हेक्टेयर है।

साजिश की परतें उजागर
निषाद बहनों ने बताया कि उनके पिता रामलाल निषाद का निधन 2007 में और माता का निधन 2014 में हुआ था। परिवार में नामांतरण तो हुआ, लेकिन ज़मीन का बँटवारा विधिवत नहीं हुआ। इस कमजोरी का फायदा उठाते हुए, 20 सितंबर 2016 को आरोपियों ने बहनों को बहलाया कि उनकी कंपनी ज़मीन को प्लॉटिंग कर विकसित करेगी। धोखे से करार पर हस्ताक्षर करवाए गए, लेकिन वादा की गई राशि का भुगतान आज तक नहीं हुआ।

करार की प्रति मिलने पर खुलासा हुआ कि 0.64 हेक्टेयर (लगभग 1 एकड़ 60 डिसमिल) ज़मीन को षड्यंत्रपूर्वक करार में शामिल किया गया। करार में यह भी उल्लेख किया गया कि 90% कॉलोनी, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, और डुप्लेक्स बनाने का अधिकार ममता निषाद के नाम होगा, ताकि वे बैनामा कर सकें। इसके लिए फर्जी हस्ताक्षर करवाकर नोटरी दस्तावेज, शपथपत्र, सहमति पत्र, और आवेदन पत्र तैयार किए गए, जिन्हें राजस्व और नगर पालिका अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

भुगतान में टालमटोल, ज़मीन पर अवैध कब्जा
निषाद बहनों का कहना है कि बार-बार मांगने के बावजूद करार में उल्लिखित राशि का भुगतान नहीं किया गया। उलटे, उनकी अशिक्षा और कानूनी अनभिज्ञता का फायदा उठाकर उनकी पुश्तैनी ज़मीन हड़प ली गई। आरोपियों ने ज़मीन पर अवैध कब्जा कर लिया और विकास के नाम पर बहनों को ठगा।

प्रशासन से न्याय की गुहार
निषाद बहनों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कर इस साजिश के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने प्रशासन से उनकी ज़मीन वापस दिलाने और दोषियों को कठोर सजा देने की अपील की है। इस मामले ने कटनी में भू माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस को फिर से उजागर किया है, जिससे प्रशासन पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

सामाजिक और प्रशासनिक सवाल
यह मामला न केवल भू माफियाओं की बेलगाम गतिविधियों को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या जिला प्रशासन और राजस्व विभाग इस तरह की साजिशों को रोकने में सक्षम है? निषाद बहनों की शिकायत के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या इस बार भू माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएँगे, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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