कटनी नगर निगम की बड़ी कानूनी जीत: 45 करोड़ की कुर्की का खतरा टला, शहर के विकास कार्यों को मिली मजबूती

शहरवासियों ने भी इस सफलता पर खुशी जताई है, क्योंकि इससे सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ कम हुआ है।

कटनी नगर निगम की बड़ी कानूनी जीत: 45 करोड़ की कुर्की का खतरा टला, शहर के विकास कार्यों को मिली मजबूती

कटनी।कटनी नगर निगम ने राजीव गांधी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स (वाणिज्य केंद्र) से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में महत्वपूर्ण कानूनी सफलता हासिल की है। न्यायालय के हालिया फैसले से निगम को 45 करोड़ रुपये (ब्याज सहित) की संभावित वसूली और संपत्तियों की कुर्की का संकट टल गया है।

इस निर्णय से न केवल निगम की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि शहर के विकास योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं के लिए आवंटित बजट भी सुरक्षित हो गया है।वर्षों पुराना विवाद और कुर्की का मंडराता खतरायह मामला 2000 के दशक से चला आ रहा है, जब नगर निगम ने स्टेशन चौराहा के पास राजीव गांधी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए मेसर्स खुशीराम एंड कंपनी को ठेका दिया था।

ठेकेदार के साथ विवाद बढ़ने पर आर्बिट्रेशन, जिला न्यायालय, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक की कार्रवाई हुई। निगम को पहले कई स्तरों पर निराशा हाथ लगी, जिससे बकाया राशि ब्याज सहित 45 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।वर्ष 2019 से चल रहे निष्पादन (execution) प्रकरण में न्यायालय ने निगम के बैंक खातों और अचल संपत्तियों की जानकारी मांगी थी।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि निगम की संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई होने वाली थी, जो शहर की वित्तीय व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करती।एकजुटता और रणनीतिक प्रयासों से पलटा परिदृश्यनगर निगम प्रशासन और निर्वाचित परिषद ने इस संकट से निपटने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति दिखाई:विशेष बैठक: 28 नवंबर 2025 को परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई

।रणनीतिक फैसला: महापौर, निगम अध्यक्ष और आयुक्त ने सर्वसम्मति से प्रभावी कानूनी पैरवी के लिए विशेष रणनीति बनाई।कुशल पैरवी: वरिष्ठ अधिवक्ता मिथिलेश जैन को निगम की ओर से पैरवी सौंपी गई। अधिवक्ता जैन ने कोर्ट में मजबूत तर्क प्रस्तुत किए कि कमर्शियल कोर्ट अधिनियम की धारा 10 के तहत यह निष्पादन प्रकरण कटनी न्यायालय में चलने योग्य नहीं है।कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया और 29 जनवरी 2026 को निष्पादन कार्यवाही समाप्त करने का आदेश जारी किया।

शहर के विकास को नया बलइस फैसले से निगम को बड़ी राहत मिली है। यदि 45 करोड़ की राशि कटती, तो सड़क, जल निकासी, सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य विकास योजनाओं पर गहरा असर पड़ता। अब ये फंड शहर की प्रगति के लिए उपलब्ध रहेंगे।नगर निगम अधिकारियों ने कहा कि यह जीत सामूहिक प्रयासों और सही कानूनी रणनीति का नतीजा है। उम्मीद है कि यह फैसला भविष्य के विवादों में भी निगम के लिए मजबूत आधार साबित होगा।

शहरवासियों ने भी इस सफलता पर खुशी जताई है, क्योंकि इससे सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ कम हुआ है।

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