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Tiddee dal : पश्चिम भारत और पश्चिम मध्य एशिया में हिंसक टिड्डों के लिए बना सकता है नया हॉटस्पॉट : अध्ययन


एक छोटा से कीट ने कर रखा है महाशक्ति अमेरिका की नाक में दम

Tiddee dal : आने वाले दशकों में, बारिश और सूखे की अनियमित अवधि पश्चिम भारत और पश्चिम मध्य एशिया में हिंसक टिड्डों के लिए नए हॉटस्पॉट बना सकती है, जिससे फसलों और खाद्य सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने पिछले सप्ताह साइंस एडवांसेज में प्रकाशित अपने शोधपत्र में तर्क दिया है कि भारत, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और ईरान में लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा और आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। उनका अनुमान है कि विशेष रूप से इन देशों में जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया में टिड्डियों के झुंडों के नए हॉट स्पॉट उभरेंगे।
अध्ययन के सह-लेखक और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के जलविज्ञानी और पर्यावरण नीति विशेषज्ञ शियाओगांग हे ने एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के कार्लोस मुरेइथी को बताया कि “इन जोखिमों का समाधान करने में विफलता से खाद्य उत्पादन प्रणालियों पर और अधिक दबाव पड़ सकता है और वैश्विक खाद्य असुरक्षा की गंभीरता बढ़ सकती है।”
अध्ययन के अनुसार, इससे क्षेत्र के नए हिस्से संभावित संक्रमण के संपर्क में आ रहे हैं ।
न्यूयार्क टाइम्स में छपे एक लेख के मुताबिक नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर शियाओगांग हे ने कहा, “चूंकि ये देश अक्सर वैश्विक अन्न भंडार के रूप में काम करते हैं और पहले से ही सूखे, बाढ़ और गर्म हवाओं जैसी जलवायु-संचालित चरम स्थितियों से जूझ रहे हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में टिड्डियों के खतरे में संभावित वृद्धि मौजूदा चुनौतियों को और बढ़ा सकती है।”
फिलहाल एक छोटा से महाशक्ति अमेरिका की नाक में दम कर रखा है।एक रिपोर्ट से पता लगता है कि अकेले अमेरिका में हर साल टिड्डे 1.5 बिलियन डॉलर कीमत की फसल चट कर जाते हैं। रुपए में यह रकम 150 करोड़ के आसपास है। टिड्डियों का एक झुंड 1 किमी के दायरे से लेकर सैकड़ों किमी के दायरे तक फैला हुआ हो सकता है। 1875 में अमेरिका में 5 लाख 12 हजार 817 स्क्वायर किमी का झुंड था। मतलब इतना बड़ा कि उसमें दो उत्तर प्रदेश समा जाएं।
दुनिया भर में टिड्डों की 10000 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। इनका रंग हल्के भूरे से लेकर गुलाबी, पीले या हरा तक होता है। इनमें भी रेगिस्तानी टिड्डा सबसे खतरनाक माना जाता है, जो अमूमन दुनिया भर में फसलों की बर्बादी के लिए जिम्मेदार है। रेगिस्तानी टिड्डे झुंड में चलते हैं। एक झुंड में 10 अरब तक टिड्डे हो सकते हैं और दिनभर में 200 किलोमीटर तक का रास्ता तय कर लेते हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य और कृषि संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक टिड्डों का दल एक बार में ढाई हजार लोगों का पेट भरने लायक अनाज चट कर जाता है। 1930 से 1950 के बीच टिड्डों का ऐसा आतंक था कि अफ्रीका के कई देश खाद्य संकट के मुहाने पर पहुंच गए थे। 60 के दशक के बाद से टिड्डों के हमले में कमी आई है लेकिन अब भी टिड्डे सबसे खतरनाक कीट माने जाते हैं।
हालांकि अब भी हर साल अलग-अलग देशों पर टिड्डियों के दल हमले करते रहते हैं। साइंस न्यूज़ के मुताबिक एक टिड्डा हर दिन अपने वजन के बराबर यानी करीब 2 ग्राम तक खाना खा सकता है। 2018-19 में अफ्रीकी देशों से लेकर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और यहां तक कि भारत के कई राज्यों में टिड्डियों का हमला देखा गया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक 2018-19 में आए साइक्लोन और खराब मौसम की वजह से टिड्डियों के हमले बढ़े।

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